सौभाग्य योग में होगा 2016 का प्रवेश, बढ़ेगी समृद्धि

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तमाम हानि लाभ, गम और खुशियां देकर जा रहे वर्ष 2015 की विदाई का समय आ गया है। बहुत से लोगों पर इस साल दैवी कृपा बरसी तमाम रंक से राजा बन गये। बहुत से ऐसे भी हैं जिन्होंने बहुत कुछ खो दिया, कितने ऐसे हैं जो हमेशा के लिए अपनों से बिछुड़ गये तो तमाम को सम्बन्धों की सौगात मिली। कुल मिलाकर हर साल कुछ न कुछ देकर या लेकर जाता  है। 2015 भी अब अवसान की ओर है। तमाम खट्टी मीठी यादें इस साल से भी जुड़ी हैं। लेकिन यह साल जाते जाते नये साल की सौगात देकर जाएगा। एक बार फिर उम्मीेदों के  झूले पर सब झूलेगे। खुशियां तलाशेंगे। तो आइये देखते हैं नये साल के पिटारे में क्या है।

वर्ष 2016 कला, धर्म, मीडिया, शिक्षा, बैंकिंग, व्यापार क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए फायदेमंद होगा। साथ ही महिलाओं व युवाओं के लिए भी फायदेमंद रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 31 दिसंबर की रात 12 बजे कन्या लग्न व उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में नए वर्ष की शुरूआत होगी। इस लग्न व नक्षत्र का गठजोड़ सौभाग्य योग बनाएगा, जिसका असर वर्ष भर समृद्धि में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई देगा। शुक्रवार, एक जनवरी 2016 का सूर्योदय धनु लग्न में होगा। यह दिन शुक्र का है, जो सुख, समृद्धि, वैभव-विलासिता देने वाला ग्रह है। इसकी अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी हैं।

31 दिसंबर को रात 12 बजे कन्या लग्न रहेगी। इसका अधिपति बुध है, जबकि दिन गुरुवार रहेगा, जिसका स्वामी बृहस्पति है। बुध, कृषि व पर्यावरण का प्रतिनिधि ग्रह भी है। इन क्षेत्रों के लोगों को अब तक हुए नुकसान की भरपाई होने की संभावना है। दोनों ग्रह कई क्षेत्रों के लोगों के लिए लाभकारी व सफलता दिलाने वाले होंगे।
मीडिया से जुड़े लोगों को भी आर्थिक सफलता मिलेगी और यश में बढ़ोतरी होगी। गुरू का शिक्षा, धर्म अध्यात्म और व्यवसायिक क्षेत्र में अाधिपत्य है। यही वजह है कि इस पूरे वर्ष इन क्षेत्रों से जुड़े लोगों को तरक्की के अवसर मुहैया होंगे। बेरोजगार युवा नौकरी पा सकेंगे। साहित्य, खेल, कला क्षेत्र व ज्वेलरी, वस्त्र व सौंदर्य प्रसाधनों का व्यवसाय करने वालों की आर्थिक उन्नति होगी। इन क्षेत्रों में महिलाएं काफी प्रसिद्धि प्राप्त करेंगी। चंद्र व गुरू की युति सेना के पराक्रम को बढ़ाएगी और राहू राजनीति में पूरे वर्ष उलटफेर कराता रहेगा, जिससे कई राजनेताओं की परेशानी बढ़ेगी।

NEW YEAR

योग जो बन रहे हैं

नववर्ष 2106 की शुरुआत कन्या लग्न से होगी। लग्न में राहु और चंद्रमा का ग्रहण योग, तुला राशि पर मंगल, वृश्चिक राशि पर शुक्र और शनि, धनु राशि पर सूर्य, मकर पर बुध, मीन पर केतु, सिंह राशि पर गुरु स्थित रहेंगे। 31 दिसंबर की रात 12 बजे उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में मंगलवर्ष की शुरुआत होगी।

मंदगामी तीन ग्रहों में से इस बार राहु और गुरु राशि परिवर्तन करेंगे, जबकि शनि पूरे वर्ष भर वृश्चिक राशि पर यथावत रहेंगे। इससे मेष और सिंह राशि पर ढैय्या का प्रभाव और तुला, वृश्चिक, धनु राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव बना रहेगा।

कालसर्प योग की छाया

इस बार जनवरी से ही उदय कालसर्प का प्रभाव शुरू हो जाएगा। यह प्रभाव फरवरी में पूर्णकालिक होगा। मार्च में आंशिक छाया रहेगी जो खरमास के प्रारंभ तक मीन की संक्रांति के बाद में छाया खत्म होगी। इसके बाद एक बार फिर 3 अगस्त को कालसर्प योग बनेगा, जो पूरे वर्ष भर इस योग का प्रभाव बना रहेगा। इस समय जन्म लेने वाले नवजात शिशु कालसर्प दोष से ग्रसित रहेंगे।

राहु का गुरु चंडाली योग

29 जनवरी से 11 अगस्त तक राहु का गुरु चंडाली योग रहेगा। इस योग में धार्मिक कार्यों में व्यवधान पैदा होगा। राहु का साथ पाने से गुरू चंडाल होगा। इसी समय कुंभ में गुरू चंडाली योग सिंह राशि पर रहेगा। सिंहस्थ में भी यह योग बना रहेगा। इस दौरान सूर्य की राशि में योग बनने से जलीय ग्रह क्षीण होंगे और पानी की कमी होगी।

ग्रहण की स्थिति

इस वर्ष का पहला खंडग्रास सूर्य ग्रहण 9 मार्च को होगा, जो भारत के पूर्वी भाग में दिखाई देगा। लेकिन इसके बाद 23 मार्च को मंद चंद्र ग्रहण और 1 सितंबर को खंडग्रास सूर्यग्रहण और 16 सितंबर को कांति मलीन चंद्रग्रहण होगा, जो भारत में नहीं दिखेगा।

केंद्र में समा जाएंगे सारे ग्रह

2 जून को खगोलीय घटना होगी। जिसमें सारे 9 ग्रह केंद्र में समा जाएंगे। इससे चार राशियों पर 9 ग्रहों का भार रहेगा। यह योग 19 अगस्त को भी बनेगा।

गुरु पुष्य योग: 14 अप्रैल, 12 मई, 9 जून को गुस्र्वार के दिन गुस्र्पुष्य योग बनेगा।

रवि पुष्य योग: 24 जनवरी, 25 सितंबर, 28 अक्टूबर को रवि पुष्य योग बनेगा।

पांच अबूझ मुहूर्त: 13 फरवरी को बसंत पंचमी, 14 जून गंगा दशहरा, 15 अप्रैल रामनवमीं, 13 जुलाई भड़ल्ली नवमीं, 9 मई को अक्षय तृतीया रहेगी।

नौतपा: सूर्य के रोहणी नक्षत्र में प्रवेश होने से 25 मई से 2 जून तक तपन काल रहेगा। इस दौरान भीषण गर्मी पड़ेगी।

विवाह मुहूर्त: 63 दिन

गृह प्रवेश: 24 दिन

 

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