बाइडेन की जीत से सऊदी अरब को सबसे ज्यादा नुकसान, बढ़ सकती है प्रिंस सलमान की मुश्किलें

अपने चुनावी कैंपेन के दौरान बाइडेन ने यह साफ कर दिया था कि यदि वो राष्ट्रपति बनते हैं तो सऊदी अरब के साथ रिश्ते पर वो फिर से समीक्षा करेंगे।

वाशिंगटन: बाइडेन के अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद पूरी दुनिया में यदि कोई देश सबसे ज्यादा परेशान है तो वो है सऊदी अरब और वहां के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान। सऊदी अरब ने बाइडेन को अमेरिका का राष्ट्रपति चुने जाने पर उन्हें एक दिन बाद बधाई दी। कहा जा रहा कि सउदी अरब के इस हिचकिचाहट के पीछे बाइडेन का सऊदी अरब के नीतियों के प्रति कड़ा रूख है। बाइडेन हमेशा से ही मोहम्मद बिन सलमान के द्वारा किये गए कार्यों की आलोचना करते रहे हैं।

बाइडेन सऊदी अरब के साथ रिश्तों पर समीक्षा करेंगे

अपने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार में बाइडेन सऊदी अरब के नीतियों की निन्दा करते रहे हैं। अपने चुनावी कैंपेन के दौरान बाइडेन ने यह साफ कर दिया था कि यदि वो राष्ट्रपति बनते हैं तो सऊदी अरब के साथ रिश्ते पर वो फिर से समीक्षा करेंगे। बाइडेन के राष्ट्रपति बनने पर सबसे ज्यादा नुकसान सऊदी अरब देश को ही होने वाला है।

मोहम्मद बिन सलमान जो कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस हैं, के रिश्ते पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ बहुत ही अच्छे थे। ट्रम्प सरकार ने हर मामले में सऊदी अरब का साथ दिया है। यहां तक कि राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रम्प ने कनाडा या मैक्सिको के बजाय पहला दौरा सऊदी अरब का किया था।

सऊदी अरब को जमाल खशोग्गी की मौत का हिसाब देना होगा

ट्रम्प ने मानवाधिकार का उलल्घन हो या यमन के साथ युद्ध का मुद्दा रहा हो हर मामले में सऊदी अरब का समर्थन किया है। वासिंगटन डी0 सी0 में सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खशोग्गी की रहस्यपूर्ण तरीके से हत्या हो जाने के बाद से पूरी दुनिया ने मोहम्मद बिन सलमान की आलोचना की थी परन्तु डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी के साथ अपने रिश्ते को मजबूत रखा और उसे हथियार बेचता रहा।

बाइडेन चुनावी कैंपन के दौरान यह साफ शब्दों में कहा था कि मोहम्मद बिन सलमान को जमाल खशोग्गी के मौत की कीमत चुकानी होगी।

ट्रम्प के लिए मानवाधिकारों और लोकतंत्र से अधिक आर्थिक हित सर्वोपरी रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जो बाइडेन मानवाधिकारों और लोकतंत्र के लिए काफी आक्रामक रूख रखते हैं।

कोविड-19 से भी अधिक खतरनाक है बाइडेन का चुनाव जीतना

सऊदी अरब के अखबार औकाज ने कहा कि बाइडेन के चुनाव जीतने से सऊदी अरब के भविष्य में अनिश्चितता आ सकती है। वहीं सऊदी अरब के एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि सऊदी अरब के लिए कोविड-19 से भी ज्यादा बुरा बाइडेन का राष्ट्रपति चुनाव जीतना है।

बाइडेन ने कहा था कि सत्ता में आने के बाद वो सऊदी अरब को हथियार नही बेचेंगे। यमन के साथ युद्ध में भी सऊदी अरब पर टिप्पणी करते हुए बाइडेन ने कहा था कि सऊदी में सामाजिक मूल्य मौजूदा नेतृत्व में नाम का ही रह गया है।

बिडेन के प्रवक्ता ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा था कि बाइडेन किसी भी तानाशाह को ब्लैंक चेक देने के बजाय मानवाधिकार और लोकतंत्र के आधार पर दोस्तों और दुश्मनों के साथ एक जैसा ही व्यवहार करेंगे।

ईरान के साथ फिर करेंगे परमाणु समझौता बहाल

ईरान के साथ भी ट्रम्प ने 2018 में परमाणु समझौते को खत्म कर दिया था और उस पर कई प्रतिबंध लगा दिये थे जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से टूट गई थी। हालांकि बाइडेन ने वादा किया है कि 2015 में हुए परमाणु समझौते को वो फिर से बहाल करेंगे। सऊदी अरब ईरान का हमेशा से दुश्मन रहा है।

अब देखना होगा कि बाइडेन अमेरिका में राष्ट्रपति शपथ लेने के बाद मोहम्मद बिन सलमान के प्रति किस तरह का रूख रखते हैं। अपने मानवाधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा वाली नीतियों के आधार पर सऊदी अरब के साथ किस तरह के रिश्ते का नींव रखते हैं।

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