SC ने किया मराठा आरक्षण को खत्म, ‘प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बना सकते हैं कानून’

सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण के कानून को खारिज कर दिया है, कोर्ट ने कहा कि मराठा आरक्षण 50% सीमा का उल्लंघन करता है

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) पर महाराष्ट्र सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मिले आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि मराठा रिजर्वेशन लागू करते वक्त 50% की लिमिट को तोड़ने का कोई संवैधानिक आधार नहीं था। मराठा आरक्षण 50% सीमा का उल्लंघन करता है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले कि, दुर्भाग्यपूर्ण है कि में मराठा समुदाय को आरक्षण के कानून को खारिज कर दिया। हमने सर्वसम्मति से कानून पारित किया था। अब न्यायालय का कहना है कि महाराष्ट्र इस पर कानून नहीं बना सकता है, केवल प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बना सकते हैं।

अपना पक्ष रखने में विफल

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बोले कि, हम सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं। महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समाज के ऐसे लोग जिनकी आय कम है, उन्हें आरक्षण दिया था। महाराष्ट्र सरकार कोर्ट में सही से अपना पक्ष रखने में विफल रही। मेरी पार्टी की तरफ से मांग है कि मराठा लोगों को आरक्षण मिलना ही चाहिए। क्षेत्रिय समाज को अलग से आरक्षण मिलना चाहिए। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखने वाला हूं।

मराठा आरक्षण के लिए पहल

महाराष्ट्र में मराठा समुदाय सरकारी नौकरियों में 16% आरक्षण की मांग कर रहा था। मराठा सेवा संघ और उसके अन्य सहयोगी संगठनों ने भी इसके लिए आंदोलन किया। मराठा सेवा संघ की युवा शाखा संभाजी ब्रिगेड इस मुद्दे पर विशेष रूप से आक्रामक थी। सतारा के छत्रपति उदयन राजे भोसले और कोल्हापुर के युवराज संभाजी राजे भोसले/करवीर ने मराठा आरक्षण के लिए पहल की थी।

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