वैज्ञानिको का दावा: अब गायब होंगी झुर्रियां और बाल भी नही होंगे सफेद

नई दिल्ली। अपनी उम्र को लेकर हम सभी परेशान रहते हैं। कौन अपनी उम्र को ढलते हुए देखना चाहता है, सब यही चाहते है कि उनकी जवानी बरकरार रहे। इसके लिए हम कितने प्रकार के जतन करते हैं, कितने नुस्खे अपनाते है, लेकिन उम्र का ढलना तो तय है साथ ही उसका असर हर हाल  में नजर आने ही लगता है। लेकिन वैज्ञानिकों ने ऐसी एंटीबायोटिक दवा बनाने का दावा किया है, जिसकी मदद से उम्र का असर कम किया जा सकता है।

इसकी खोज यूनीवर्सिटी ऑफ अल्‍बामा के शोधकर्ताओं ने किया है। वैज्ञानिको ने चूहों पर रिसर्च किया है जिससे उन्होंने न सिर्फ झुर्रियां कम करने में सफलता मिली साथ ही बालों कि सफेदी भी कम करने में कामयाबी मिली। यूनीवर्सिटी ऑफ अलबामा के रिसर्चेर ने एक खास तरह कि एंटीबायोटिक दवा बनायी और उसको चूहों पर टेस्ट किया। इस दवा के जरिये उन्होंने चूहों की कोशिकाओं में मौजूद माइटाकॉन्ड्रिया में बदलाव किया।

माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिकाओं का पावर हाउस भी कहा जाता है। जीवित रहने के लिए 90फीसदी उर्जा जरुरी होती है जिसका निर्माण माइटोकॉन्ड्रिया करता है।। इसलिए उसके असामान्य काम करने से उम्र से जुड़ी बीमारियां इनसान को अपना शिकार बनाने लगती हैं। इसमें हृयद संबंधी और कैंसर जैसी बीमारियों का नाम लिया जा सकता है।

अध्‍ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने चूहों को भोजन में मिलाकर डॉक्‍सीसाइक्‍लीन एंटीबायोटिक दवाएं दीं जिससे ऐसे एंजाइम प्रभावित हुए जो माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए की प्रतिकृति बनाने में मदद करते हैं। इससे कोशिकाओं को मिलने वाली ऊर्जा की आपूर्ति बाधित हुई।

चार हफ्तों तक डॉक्‍सीसाइक्‍लीन की डोज देने के बाद चूहों में झुर्रियां दिखने लगीं और बाल सफेद होने लगे। उनमें उम्र से संबंधी शिथिलता और थकावट भी देखने को मिली। इस असर को उन्होंने डॉक्‍सीसाइक्‍लीन दवाएं एक महीने तक बंद करके पलटने का दावा किया है।

प्रमुख शोधकर्ता और यूएबी स्‍कूल ऑफ मेडिसिन में जेनेटिक्‍स विभाग के प्रोफेसर केशव सिंह का कहना है कि इस शोध से भविष्‍य में उम्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज में मदद मिलने की उम्मीद है। यह अध्‍ययन सेल बायोलॉजी में प्रकाशित हो चुका है।

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