आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने प्रदूषण मापने वाले एक करोड़ वाला सेंसर 50 हजार में बनाया

उत्तर प्रदेश: आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने प्रदूषण मापने वाले सबसे सस्ते सेंसर को विकसित किया है। जो पीएम 10 और पीएम 2.5 के साथ हानिकारक गैस (ओजोन और नॉक्स) का स्तर भी बताएगा। आमतौर पर इस तरह के सेंसर की लागत एक करोड़ होती है लेकिन वैज्ञानिकों ने मात्र 50 हजार में इसे तैयार किया है। इसकी जून में टेस्टिंग की जाएगी। यदि टेस्टिंग में सेंसर सफल हुआ तो देश के 150 शहरों में इसे लगाया जाएगा।

बुधवार को यह जानकारी आईआईटी कानपुर में सीनियर प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने दी। उन्होंने बताया कि इंडो-यूएस साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट के तहत सस्ता और अच्छा मॉनिटरिंग सेंसर तैयार करने में कामयाबी पाई है। सबसे पहले आईआईटी कानपुर में 25 और आईआईटी बांबे में 15 सेंसर लगाए जाएंगे। डाटा के परीक्षण के बाद वाराणसी में 50 से 60 सेंसर लगेंगे। तकनीक को विकसित करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने छह करोड़ रुपये दिए हैं।

आज प्रदूषण पर मंथन
आईआईटी में हुई प्रेसवार्ता में इंस्टीट्यूट के डीन रिसर्च एंड एल्युमनाई प्रो. बीवी फणी ने बताया कि देश के बढ़ते प्रदूषण को देख दुनियाभर में रह रहे पूर्व छात्र चिंतित हैं। ऐसे में सभी ने तय किया है कि वह प्रदूषण दूर करने के लिए एकसाथ काम करेंगे। गुरुवार को इसपर मंथन किया जाएगा। आईआईटी में देशभर के कई बड़े वैज्ञानिक, पर्यावरणविद और शिक्षाविद मंथन करेंगे।

जिसका निष्कर्ष केंद्र, राज्य सरकारों को भेजा जाएगा। एक मॉडल तैयार होगा जिसपर सरकारें सही दिशा में काम करेंगी तो परिणाम अच्छे आएंगे। प्रेसवार्ता में एल्युमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप भार्गव, बैद्यनाथ, इरफान पठान, राहुल पटेल आदि मौजूद रहे।

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