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मुकेश और अनिल अंबानी पर SEBI ने लगाया 25 करोड़ का जुर्माना

रिलायंस इंडस्ट्री के प्रमोटर और पर्सन एक्टिंग इन कंसर्ट मैं साल 2000 में 5 परसेंट से ज्यादा हिस्सेदारी का खुलासा नहीं किया था खास बात यह है कि साल 2005 में अनिल और मुकेश अंबानी में कारोबार का बंटवारा हुआ था।

नई दिल्ली: मार्केट रेगुलेटर सेबी ( SEBI  ) ने मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी समेत कई अन्य लोगों पर 25 करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना साल 2000 में रिलायंस इंडस्ट्री ( Reliance Industry ) मामले में टेकओवर नियमों को नहीं पूरा करने के लिए लगाया गया है। और SEBI यही नहीं रुकी बल्कि अंबानी परिवार के कई सदस्यों पर भी सख्ती करते हुए जुर्माना लगाया है।

आपको बता दें कि अम्बानी परिवार के बाकी लोगों पर सेबी ने जुर्माना लगाया है उनमे नीता अंबानी, टीना अंबानी, के डी अंबानी, शामिल है। वतादे कि नीता अंबानी मुकेश अंबानी की पत्नी है और टीना अंबानी अनिल अंबानी की पत्नी है। SEBI ने अपने 50 पेज के आदेश में लिखा है कि रिलायंस इंडस्ट्री ( Reliance Industry ) के प्रमोटर और पर्संस एक्टिंग इन कॉन्सर्ट (PAC) में साल 2000 में 5 परसेंट से ज्यादा हिस्सेदारी का खुलासा नहीं किया था। खास बात यह है कि साल 2005 में अनिल और मुकेश अंबानी में कारोबार का बंटवारा भी हुआ था।

किन नियमों का किया उल्लंघन

SEBI के मुताबिक रिलायंस के प्रमोटरों ने साल 1994 में उनको जारी 3 करोड़ वारंट के कन्वर्जन के दौरान उन्होंने साल 2000 के दौरान कंपनी में 6.83 परसेंट हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था। इस पर SEBI का कहना है कि RIL के प्रमोटरों द्वारा PACs के साथ मिलकर 6.83 परसेंट हिस्सेदारी ली है। जबकि वह टेकओवर नियमों के अनुसार 5 परसेंट होनी चाहिए थी और यह से ज्यादा थी।

अधिग्रहण की जानकारी नहीं दी गई थी

इसलिए 7 जनवरी 2000 को जी शेयरों का अधिग्रहण किया गया था उसका इलाज करने की प्रतिबद्धता थी। ये वही तारीख थी जब PACs को RIL के इक्विटी शेयर अलॉट किए गए थे। हालांकि SEBI ने पाया कि प्रमोटर और PAC ने शेयरों के अधिग्रहण को लेकर कोई पब्लिक अनाउंसमेंट ( Public announcement ) नहीं किया। इसलिए इन लोगों ने टेकओवर नियमों को उल्लंघन किया है।

क्या कहता है सेबी का नियम

सेबी के नियमों के अनुसार वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन 31 मार्च को कोई भी प्रमोटर ग्रुप 5 परसेंट से ज्यादा वोटिंग राइट्स प्राधिकरण करता है तो उसे माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए एक ओपन ऑफर लेकर आना होता है। वहीं इन लोगों ने शेयर अधिग्रहण को लेकर कोई ऐलान नहीं किया था इससे शेयरहोल्डर्स कंपनी से निकलने के अपने अधिकार से वंचित रह गए। SEBI के आदेशनुसार 25 करोड़ की पेनाल्टी संयुक्त रूप से अलग-अलग चुकानी होगी। मामले में कुल 34 लोग और कंपनियां शामिल हैं जिसमें कई तो रिलायंस इंडस्ट्री होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड ( Reliance Industries Holding Pvt Ltd ) के साथ मिले भी हो चुका है।

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