नागपंचमी पर पूजा करने का देखें शुभ समय, जानिए क्यों पीटी जाती है गुड़िया

लखनऊ: नागपंचमी का त्योहार आज शुक्रवार 13 अगस्त को मनाया जा रहा। ये त्योहार हर साल सावन माह में पंचमी तिथि को मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में पौराणिक काल से ही सांपों को देवता के रूप में पूजा की जाती है।शुक्रवार को नागपंचमी का पर्व हस्‍त नक्षत्र व साध्‍य योग में मनाया जाएगा।

सावन भोले शंकर का महीना चल रहा तो वहीं नागदेवता को भगवान भोलेनाथ और विष्णु का सर्वाधिक प्रिय बताया गया है। पंचमी तिथि दोपहर 1.42 बजे तक रहेगी, इसलिए इससे पहले ही नाग पंचमी की पूजा कर लेनी सही रहेगी। इस दिन हस्त नक्षत्र शाम 7.58 बजे तक और साध्य योग शाम 6.48 बजे तक रहेगा। ये दोनों योग बहुत ही फलदायी हैं।

भगवान का प्रिय शर्प

भगवान शिव को शर्प इतना पसंद है कि अपने गले में माला की तरह सर्प को स्थान देते हैं। वहीं भगवान विष्णु शेषनाग पर ही विश्राम करते हैं। नाग देव पाताल लोक के स्वामी माने जाते हैं। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से उनकी कृपा बनी रहती है और वह घर की सुरक्षा करते हैं। नागपंचमी के पूजन से कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है।

नागपंचमी के दिन नाग देवता को दूध और धान का लावा का प्रसाद चढ़ाया जाता है। इस दिन सभी लोग सुबह के समय लोग गिलास अथवा लौटे में दूध लेकर नाग चित्र पर दूध चढ़ाकर सुगंधित धूप से पूजा अर्चना करते हैं। नाग देवता का दर्शन करना भी शुभ माना जाता है।

उत्तर प्रदेश की परंपरा

नागपंचमी के दिन उत्तर प्रदेश में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। आज के दिन गुड़िया को पीटा जाता है। इसके पीछे कई तरह की कहानियां जुड़ी है। एक कथा के मुताबिक, तक्षक नाग के काटने से राजा परीक्षित की मौत हो गई थी, कुछ सालों बाद तक्षक की चौथी पीढ़ी की कन्या का विवाह राजा परीक्षित की चौथी पीढ़ी में हुआ। विवाह के बाद उसने यह राज एक सेविका को बताया। कन्या ने सेविका से कहा कि वो ये बात किसी और को ना बताए लेकिन सेविका से रहा नहीं गया और उसने यह बात एक दूसरी सेविका को बता दी। इस तरह बात फैलते-फैलते ये बात पूरे नगर में फैल गई।

ये है अहम वजह

तक्षक के राजा तक जब यह बात पहुंची तो उन्हें क्रोध आ गया। उन्होंने नगर की सभी स्त्रियों को चौराहे पर इकट्ठा होने का आदेश दिया। इसके बाद कोड़ों से पिटवाकर उन्हें मरवा दिया। राजा को इस बात का गुस्सा था कि औरतों के पेट में कोई बात नहीं पचती और इस वजह से उसकी पीढ़ी से जुड़ी अतीत की एक पुरानी बात पूरे साम्राज्य में फैल गई। मान्यताओं के अनुसार, तभी से यहां गुड़िया पीटने की परंपरा मनाई जा रही है।

 

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