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IPL और धोनी से मतभेद पर सहवाग ने खोली जुबान

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नई दिल्ली।  पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि उन्होंने अपने करियर के शुरूआती दिनों में सचिन तेंदुलकर को फॉलो करने के लिये अपनी तकनीक में बदलाव किये थे।

उन्होंने क्रिकइन्फो से कहा, ‘‘मैं केवल अपना खेल खेलता था और इस बारे में नहीं सोचता था कि मुझे तेजी से रन बनाने हैं या कुछ अलग करना है सिवाय इसके कि जब मैं टीम से जुड़ा तो तब तेंदुलकर की तरह बल्लेबाजी करना चाहता था। मुझे अहसास हुआ कि तेंदुलकर केवल एक हो सकता है और मैंने अपना स्टांस और बैकलिफ्ट बदली। मुझे अहसास हुआ कि मुझे अपना खेल बदलना चाहिए और मैंने ऐसा किया। इसके बाद मैं अपनी तकनीक से खेलने लगा।’’  अब 37 वर्ष के सहवाग भारत की तरफ से 2013 तक खेले। उन्होंने 104 टेस्ट मैचों में 8586 रन और 251 वनडे में 8273 रन बनाये।

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घरेलू क्रिकेट में हाल में दिल्ली के बजाय हरियाणा की तरफ से खेलने वाले सहवाग ने स्वीकार किया कि कई राज्य संघों का संचालन दक्षतापूर्वक नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हां ऐसा केवल दिल्ली के साथ नहीं है। अन्य संघ भी हैं जिनके साथ समस्याएं जुड़ी हैं। आपको अंडर-19 और अंडर-16 स्तर पर बदलाव करने की जरूरत है क्योंकि असली समस्याएं यहां होती है।

मैं चयनकर्ता नहीं बन सकता

सहवाग से पूछा गया कि क्या वह राज्य संघों में कोई भूमिका निभाना चाहते है, उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, यह हितों का टकराव है। मेरा अपना सहवाग इंटरनेशनल स्कूल है। इसलिए मैं इसका हिस्सा नहीं हो सकता हूं। मैं चयनकर्ता नहीं बन सकता लेकिन यदि कोई संघ मुझे अपना हिस्सा बनाना चाहेगा तो मुझे ऐसा करना पसंद होगा। उन्होंने कहा, ‘‘क्या हो रहा है कि जो लोग सत्ता में हैं वे चयनकर्ताओं को नाम सुझाते हैं और चयनकर्ता तब उन लोगों के इशारों पर चलते हैं। ’’

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IPL के साथ खड़े सहवाग

आईपीएल में स्पाट फिक्सिंग ने क्रिकेट जगत को झकझोर दिया लेकिन सहवाग अब भी इस टी20 टूर्नामेंट के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि यह युवाओं के लिये लोगों का ध्यान खींचने के लिये अच्छा मंच है। सहवाग ने कहा, ‘‘स्पॉट फिक्सिंग और मैच फिक्सिंग का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है लेकिन इसकी परवाह करने की जिम्मेदारी व्यक्तिगत खिलाड़ी की है। यदि खिलाड़ी ऐसा करना चाहता है तो उसे रोकना मुश्किल है।’’

अब और नहीं खेलना चाहता

उन्होंने कहा, ‘‘रविंद्र जडेजा, यूसुफ पठान, वार्नर, ग्लेन मैक्सवेल जैसे खिलाड़ियों ने आईपीएल से पहचान बनायी। यह विश्व भर के खिलाड़ियों के लिये मंच है। यदि खिलाड़ी आईपीएल में खेलकर पैसा बना रहा है तो यह उसकी गलती नहीं है कि वह भारत के लिये नहीं खेल रहा है। वह भाग नहीं रहा है। वह प्रथम श्रेणी, एकदिवसीय क्रिकेट और आईपीएल में खेल रहा है। यदि चयनकर्ता उसे नहीं चुनते तो वह क्या कर सकता है। ’’ सहवाग ने कहा कि उन्होंने आईपीएल में नहीं खेलने का फैसला इसलिए किया क्योंकि अब उनकी इच्छा भारतीय टीम में शामिल होने की नहीं है।

अब IPL खेलने का कोई मतलब नहीं

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय खिलाड़ी भारतीय टीम में शामिल होने के लिये आईपीएल में खेलते है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद आईपीएल में खेलने का मतलब नहीं बनता है। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से कोई युवा खिलाड़ी खेलने से वंचित रह जाए। मनन वोहरा अब सभी 14 मैचों में खेल सकता है और यदि वह अच्छा प्रदर्शन करता है तो भारतीय टीम में चुना जा सकता है। मैं एक युवा खिलाड़ी की जगह नहीं रोकना चाहता हूं। ’’सहवाग ने कहा, ‘‘मैंने काफी पैसा कमा लिया है। मैं पैसे के लिये खेल नहीं खेल रहा हूं। यदि मैं कमेंट्री करता हूं, लेख लिखता हूं या समाचार चैनलों पर विशेषज्ञ के तौर पर जाता हूं तब भी पैसा कमा सकता हूं। ’’

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बीसीसीआई को सहवाग का सुझाव

उन्होंने कहा, ‘‘मैं बीसीसीआई को सुझाव देता हूं कि यदि वे इस पर विचार कर सकते हैं और घरेलू क्रिकेट को सम्मान देते है तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की तरफ से घरेलू क्रिकेटरों को भी विश्राम का समय दिया जाना चाहिए। आप अक्तूबर में इसकी शुरूआत करके मार्च-फरवरी में इसे समाप्त कर सकते हैं। ’’

कप्तानी न मिलने का दर्द रहा

सहवाग से पूछा गया कि क्या वह भारत की तरफ से अधिक मैचों में कप्तानी करना पसंद करते, उन्होंने कहा, ‘‘मैंने तीनों प्रारूपों में भारत की कप्तानी की। जब राहुल द्रविड़ ने कप्तानी छोड़ी तो मैं टीम का हिस्सा नहीं था। यदि मैं टीम का हिस्सा होता तो संभवत: दो साल तक कप्तान रहता। यदि मैं तब कप्तान के रूप में अच्छा करता तो आगे भी कप्तान बने रह सकता था लेकिन यह सब मौकों पर निर्भर करता है।’’

धोनी से कोई मतभेद नहीं

उन्होंने कहा, ‘‘धोनी कप्तानी के लिये सही व्यक्ति था और उसने कप्तान के रूप में बहुत अच्छी भूमिका निभायी। महत्वपूर्ण बात यह थी कि हमने विश्व कप जीता और दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम बने। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे उसके साथ अच्छे संबंध हैं। लोगों ने शिकायत की लेकिन मैंने उसका आभार(संन्यास के दौरान भाषण में) व्यक्त नहीं किया। मैंने अपने सभी साथियों का आभार व्यक्त किया, इसलिए उसमें वह भी शामिल था। ’’ सहवाग ने भविष्य के बारे में कहा, ‘‘मैं कोच, मेंटर या बल्लेबाजी सलाहकार बनना पसंद करूंगा। मैं हिन्दी में कमेंट्री करना चाहूंगा।’’

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