राज्य में जल्द लगेंगे भूकंपमापी यंत्र, मंत्रालय ने दी मंजूरी

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नैनीताल। उत्तराखंड में कुछ ही दिनों पहले भूकंप आया था। हालांकि इसमें ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था लेकिन इस पर सरकार ने जरुर अपनी कमर कस ली है। इसी को देखते हुए उत्तराखंड की केंद्रीय पृथ्वी मंत्रालय ने अगले दो साल के भीतर राज्य में करीब डेढ़ सौ भूकंपमापी यंत्र लगाने की मंजूरी दी है। जबकि 30 जगहों पर अभी तक सयंत्र लगाये जा चुके हैं।

भूकंपमापी यंत्र

राष्ट्रीय भूभौतिकी संस्थान हैदराबाद की ओर से राज्य के डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग के साथ मिलकर शहरों में माइक्रोजोनेशन का काम कर रहे हैं। जिनमें देहरादून के मसूरी और नैनीताल को मुख्य रखा गया है। इस तरह जिन भी क्षेत्रों में भूकंप आने के ज्यादा चांस रहते हैं उन जगहों को चिह्नित किया जायेगा। इस दौरान भूकंप आने पर रेस्पांस क्या होगा, इसका भी आंकलन होगा।

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी व गोरीगंगा के समीप तोली गांव, नारायण नगर डीडीहाट, रानीखेत में कालाखेत, चमोली जिले के भराड़ीसैंण, चम्पावत जिले के सुयाल खर्क व अल्मोड़ा के धौलछीना में सेंटर स्थापित किए गए हैं। राज्य के पर्वतीय जिले भूकंप की दृष्टि से जोन-चार व जोन पांच (संवेदनशील व अति संवेदनशील) में आते हैं।

वहीं कुमाऊं विवि के वरिष्ठ भू वैज्ञानिक प्रो। सीसी पंत के मुताबिक, राज्य में कहां पर भवन बनाये जाएंगे, कहां पर नहीं, उनकी उंचाई क्या राखी जाएगी इससे सम्बंधित एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इनमें स्कूलों को भी शामिल किया जाएगा।

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