आत्मनिर्भर भारत : जनजातीय मामलों का मंत्रालय केवीआईसी से करेगा 2 करार

नई दिल्ली: सरकार के महत्वाकांक्षी आत्मनिर्भर भारत (Self dependent India) अभियान को आगे बढ़ाते हुए, जनजातीय मामलों के मंत्रालय, खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के साथ दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ता़क्षर करने के लिए तैयार है। यह समझौता जनजातीय छात्रों के लिए खादी कपड़े खरीदने और प्रमुख रोजगार (Employment) सृजन योजना- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMIGP) को लागू करने के मद्देनजर (KVIC) के साथ भागीदारी करने के लिए किया जा रहा है।

मंत्रालय देशभर के एकलव्य आवासीय स्कूलों में पढ़ने वाले आदिवासी छात्रों के यूनिफॉर्म के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये के खादी के 6 लाख मीटर से अधिक की फैब्रिक की खरीद करेगा। दूसरे समझौता ज्ञापन के हिस्से के रूप में, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त विकास निगम (एनएसटीएफडीसी), जनजातीय मामलों के मंत्रालय की एक एजेंसी, पीएमईजीपी योजना को लागू करने में केवीआईसी के भागीदार के रूप में काम करेगी।

एनएसटीएफडीसी एक ऐसी एजेंसी है जो अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के उद्यमों के वित्तपोषण के लिए भारत में आदिवासियों के आर्थिक विकास के लिए रियायती ऋण़ योजनाएं प्रदान करती है। मामले से जुड़े एक जनजातीय मामलों के मंत्रालय के सूत्र ने कहा कि दोनों एमओयू पर इस सप्ताह के अंत में हस्ताक्षर किए जाएंगे।

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एमओयू खादी कारीगरों और आदिवासियों के लिए स्थानीय और स्व-रोजगार पैदा करके सरकार के आत्म निर्भर भारत अभियान के अनुरूप हैं। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि खादी कपड़े की भारी खरीद कारीगरों के लिए अतिरिक्त रोजगार और आय पैदा करेगी।

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अधिकारियों ने कहा कि खादी कपड़े की खरीद के लिए पहला एमओयू एनईएसटी और केवाईआईसी के बीच होगा जबकि दूसरा एमओयू एनएसटीएफडीसी और केवाईआईसी के बीच होगा।

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