नीतीश के फैसले पर चला राजनीतिक चाबुक, हुए कई वार

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नई दिल्ली: महागठबंधन सरकार में मची खींचतान के बीच बिहार की राजनीति जगत में ऐसा विस्फोट हुआ जिससे राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया और महागठबंधन सरकार के परखच्चे उड़ गए। जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने महागठबंधन से नाता तोड़ते हुए बीते बुधवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और उसके एक दन बाद ही विपक्ष की भूमिका निभाने वाली भारतीय जनता पार्टी से हाथ मिलाते हुए दोबारा मुख्यमंत्री पद पर आसीन हो गए।

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आइए अब आपको बताते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस फैसले का राजनीति जगत पर क्या आर पड़ा है। दरअसल, राजनीतिक गलियारों में सीएम नीतीश कुमार के इस फैसले पर तरह-तरह के प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कोई इसे राजनीति का मास्टरस्ट्रोक कह रहा है तो कोई इसे मौकापरस्ती। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उम्र अब्दुल्ला तक इसपर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

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माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर एक तरफ जहां पीएम नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार और सुशील मोदी को बधाई दी है वहीं यूपी के सीएम अखिलेश यादव चुटकी लेते नजर आये हैं।

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यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने सीधे नीतीश कुमार पर ताना कसते हुए ट्विटर पर लिखा- ना ना करते, प्यार तुम्हीं से कर बैठे, करना था इंकार मगर इक़रार तुम्हीं से कर बैठे।

वहीं कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने बिहार के घटनाक्रम को लेकर ट्वीट किया- एक बार फिर से बिहार में राज्यपाल ने सरकारिया कमीशन और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया है।

Single largest party RJD को मौका नहीं दिया गया है। BJP का प्रजातंत्र में विश्वास ना पहले था ना अब है। इस कृत्य के लिए धिक्कार है।

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने नीतीश और सुशील कुमार मोदी की तस्वीर को पोस्ट करते हुए लिखा,  ”रिश्ता मुबारक। खुश रहो, आबाद रहो और अब साथ रहो।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने ट्विटर पर लिखा, ”अवसरवादी राजनीति और नेताओं का कुरूप चेहरा दिख रहा है। सत्ता के लिए समर्थन लेना और सत्ता के लिए धोखा देना’।”

आरजेडी के मनोझ झा ने कहा, ”नीतीश कुमार संघ से निकले और संघ की शाखा में ही पहुंच गए. तेजस्वी एक बहाना था उन्हें तो बीजेपी की गोद में जाना था.”

 

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