सात चीजें कितना भी छुपा लो छुपती नहीं है,रहीम दास जी के कहे अनुसार

लखनऊ: रहीम दास जी के दोहे मानवता का सन्देश देते है। मानवता को प्रेरित करने वाले रहीम जी के दोहे व्यक्ति को एक अनोखा सन्देश देते है। जो कि मनुष्य को एक सद्प्रेमी के रूप में निखारते है।

फ्रेंडशिप डे से जुड़े है कई राज, जानिए क्यों मनाया जाता है फ्रेंडशिप डे

खैर, खून, खांसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।
रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥

भावार्थ: सात बातें ऐसी हैं जो किसी की लाख कोशिशों के बावजूद भी गुप्त नहीं रह सकती। ये सात बातें हैं खैर मतलब सेहत, खून यानि कत्ल, खांसी, खुशी, बैर यानी दुश्मनी, प्रीति यानी प्रेम और मदपान मतलब शराब का नशा। इन बातों को आप भले ही जाहिर ना करें, लेकिन ये जाहिर हो ही जाती हैं।

यह रहीम निज संग लै, जनमत जगत न कोय 

बैर, प्रीति, अभ्यास जस, होत होत ही होय 

भावार्थ: दुश्मनी, प्रेम, अभ्यास और यश या मान-सम्मान के साथ कोई मनुष्य अपने साथ लेकर पैदा नहीं होता। या चीजें धीरे-धीरे मनुष्य के आचरण और प्रयासों के साथ बढ़ती हैं।

जे गरीब पर हित करैं, हे रहीम बड़ लोग।

कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग॥

भावार्थ: रहीमदास जी कहते हैं- जो गरीबों का हित करते हैं वे बड़े लोग होते हैं, जैसे सुदामा कहते हैं कृष्ण की मित्रता भी एक साधना है।

जो रहीम ओछो बढ़ै, तौ अति ही इतराए।

प्यादे सों फरजी भयो, टेढ़ो टेढ़ो जाए॥

भावार्थ: रहीमदास जी कहते हैं- ओछे लोग जब प्रगति करते हैं तो वे बहुत ही इतराते हैं। टीक वैसे ही जैसे शतरंज के खेल में जब प्यादा फर्जी बन जाता है तो वह टेढ़ी चाल चलने लगता है।

बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय।

रहिमन बिगरे दूध को, मथे न माखन होय॥

भावार्थ: जब बात बिगड़ जाती है तो किसी के लाख कोशिश करने पर भी बनती नहीं है, जैसे जिस तरह बिगड़े हुए दूध आप जाहे जितना मथे उससे माखन नहीं निकल सकता।

Related Articles

Back to top button