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‘असम में Sex selection (Artificial-Insemination) से केवल गाय पैदा होगी, न कि बैल’

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने यह बोला है, राज्य पशुओं में लिंग आधारित वीर्य का इस्तेमाल करके कृत्रिम गर्भाधान शुरू करेगा

गुवाहाटी: असम (Assam) के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने यह बोला है कि राज्य पशुओं में लिंग आधारित वीर्य (Semen) का इस्तेमाल करके कृत्रिम गर्भाधान (Artificial insemination) शुरू करेगा ताकि कुछ सालों के बाद केवल बेहतर नस्ल की गायें (Cows) पैदा हों और कोई बैल (Bull) न हो। लिंग-क्रमित वीर्य (Sex-sorted semen) के प्रयोग से बछड़े के लिंग का पूर्व-निर्धारण किया जा सकता है।

 

हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी बोला कि जब्त मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए चाय बागान के इलाको में गौशालाएं खोली जाएंगी। उन्होंने यह कहा कि, पशु चिकित्सा विभाग ने मुझे बताया है कि हम पशुओं में लिंग आधारित वीर्य (Sex Based Semen) का उपयोग करके कृत्रिम गर्भाधान के लिया जा सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि 10 से 20 साल के बाद मवेशियों की नस्ल केवल गाय होगी, न कि बैल पैदा होंगी।

नर पशु का वीर्य कृत्रिम ढंग से एकत्रित कर मादा के जननेन्द्रियों (गर्भाशय ग्रीवा) में यन्त्र की सहायता से कृत्रिम रूप से पहुंचाना ही कृत्रिम गर्भाधान (Artificial insemination) कहलाता है।

कृत्रिम गर्भाधान के लाभ-

  • उन्नत गुणवत्ता के सांडो का वीर्य दूरस्थ स्थानों पर प्रयोग करके पशु गर्भित करना।
  • एक गरीब पशुपालक सांड को पाल नहीं सकता, कृत्रिम गर्भाधान से अपने मादा पशु को गर्भित करा कर मनोवांछित फल पा सकता है।
  • इस ढंग से बड़े से बड़े व भारी से भारी सांड के वीर्य से उसी नस्ल की छोटे कद की मादा को भी गर्भित कराया जा सकता है।
  • कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से वीर्य संग्रह किया जा सकता है। इस प्रकार एक सांड से साल में कई हजार पशु गर्भित होंगे और इससे उन्नत सांडों की कमी का समाधान भी होगा।
  • रोग रहित परीक्षित सांडों के वीर्य प्रयोग से मादा को नर द्वारा यौन रोग नहीं फैलते।
  • कृत्रिम गर्भाधान द्वारा मादा की गर्भधारण क्षमता में वृद्धि होती है क्योंकि कृत्रिम गर्भाधान अत्तिहिंमीकृत प्रणाली से 24 घंटे उपलब्ध रहता है।
  • चोट खाई लूली-लंगड़ी मादा जो नैसर्गिता अभिजनन से गर्भित नहीं किये जा सकता परन्तु कृत्रिम गर्भाधान गर्भधारण कराया जा सकता है।
  • इच्छित प्रजाति, गुणों वाले सांड़ जैसे कि अधिक दूध उत्पादक अथवा कृषि हेतु शक्तिशाली अथवा दोहरे उद्देश्य प्रजाति से गर्भित करा कर इच्छित संतति प्राप्त कर सकते है।
  • इस विधि से संकर प्रजाति या नयी प्रजाति तैयार की जा सकती है।
  • यह दुग्ध उत्पादन वृद्धि हेतु सर्वोत्तम साधन है क्योंकि संकर प्रजनन में प्राप्त बछिया जल्दी गर्मी पर आकर ढ़ाई वर्ष में ब्या जाती है तथा मौ से अधिक दूध (Milk) देती है।

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