जर्जर वाटर टैंक बना विभाग के लिए मुसीबत, संकट में गांव

जौनपुर में जर्जर वाटर टैंक बना विभाग के लिए मुसीबत, संकट में गांव

जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में जल निगम के जर्जर ओवरहेड टैंक (ओएचटी) विभाग के लिये मुसीबत का सबब बने हैं वहीं ग्रामीण इलाकों के बड़ी आबादी भीषण जल संकट से जूझ रही है। विभाग के सूत्रों ने बताया कि अधिकतर टैंक की मियाद भी खत्म हो चुकी है। यह 30 वर्ष के लिए बनाए जाते हैं, जिन्हें विशेष परिस्थितियों में पांच वर्ष अतिरिक्त चलाया जाता है।

संकट में गांव

जिले में बने अधिकतर टैंक निर्धारित समय सीमा को पार कर चुके हैं। कई ऐसे टैंक हैं, जो 35 वर्ष का समय पूरा कर चुके हैं। वर्ष 2017 में करोड़ों रुपये की लागत से नई टंकियों को बनाने की योजना भी आज तक धूल फांक रही है। पानी की किल्लत की वजह से तमाम गांव संकट से जूझ रहे हैं।

निगम की योजनाएं पुरानी

उन्होंने बताया कि जल निगम की अधिकतर योजनाएं तकरीबन 35 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं। वर्ष 2017 में परियोजनाओं के पुनर्गठन के लिए 242 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था, जिसकी मंजूरी नहीं मिल सकी। इसमें नई पाइप लाइनों को बिछाने के साथ ही ओवरहेड टैंक बनाने का प्रस्ताव था। मौजूदा समय में खराब पड़े मोटर व लीकेज की वजह से अधिकतर गांवों में पानी सप्लाई नहीं हो पा रही है, जिससे लोग परेशान हैं।

टंकियों की सफाई का निर्देश

सूत्रों ने बताया कि गांव से लेकर नगर तक कुल 87 ओवर हेड टैंक बनाए गए हैं। इनमें 35 की साफ-सफाई व देख-रेख का जिम्मा ग्राम पंचायतों को सौंपा गया है। आमतौर पर प्रत्येक वर्ष पानी की टंकियों की सफाई का निर्देश दिया गया है, लेकिन ऐसा किया नहीं जा रहा है। ओएचटी की साफ-सफाई का जिम्मा ग्राम पंचायतों को सौंपने के बाद स्थिति और खराब हो गई है। जल निगम के अधिकारी ओचएटी का हाल जानने कभी पहुंचते ही नहीं है।

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