महानगरों में छाया थाईलैंड का अमरुद, कीमत सुन हो जाएंगे हैरान

थाईलैंड का अमरुद महानगरों में 150 से 200 रुपए प्रति किलो मिलता है । थाई अमरुद बिना फ्रिज के आठ दस दिनों तक तरोताजा बना रहता है

नई दिल्ली: थाईलैंड का अमरुद महानगरों  में 150 से 200 रुपए प्रति किलो मिलता है । थाई अमरुद बिना फ्रिज के आठ दस दिनों तक तरोताजा बना रहता है जबकि परम्परागत किस्मों का स्वाद और स्वरूप दो 3 दिनों के बाद खराब होने लगता है ।

विटामिन सी और बायोएक्टिव तत्वों से भरपूर होने के कारण दिन प्रतिदिन अमरुद के पौधों की मांग बढ़ रही है । सुपाच्य रेशे के कारण इसे मधुमेह पीड़ितों (Diabetic Patient) के लिए फायदेमंद माना जाता है। संस्थान की ओर से विकसित ललित किस्म न केवल विटामिन सी से भरपूर है। चिकित्सा अनुसंधान में पाया गया है कि लाइकोपीन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कैंसर का खतरा कम होता है ।

थाईलैंड का अमरुद
थाईलैंड का अमरुद

CISH उपभोक्ताओं की मांग

सीआईएसएच उपभोक्ताओं की मांगों और प्रसंस्करण उद्योग की जरूरतों के अनुरुप अधिकतम पैदावार देने वाली अमरुद की नई  किस्म के विकास को लेकर चर्चित रहा है। इस संस्थान ने अमरुद के लाखों पौधे तैयार किए हैं, जिसे देश के अलग अलग हिस्सों में लगाया गया है। अमरुद की ललित, श्वेता और धवल किस्मों को बड़ी संख्या में अलग अलग राज्यों में किसानों ने लगाया है। इस अनुसंधान का उद्देश्य क्रंची अमरुद के विकास के साथ साथ उसमे परम्परागत मिठास लाना भी है। किसान नए किस्म के अमरुद का विकास चाहते हैं जिससे उन्हें बाज़ार में अच्छा मूल्य मिल सके।

संस्थान के निदेशक शैलेन्द्र राजन के अनुसार अधिकांश भारतीय किस्म के अमरुद का गुदा मुलायम और यह थाई अमरुद से अलग होता है। हाल के दिनों में थाईलैंड के अमरुद का आयात बढ़ा है और इसके क्रंची स्वरूप ने लोगों को प्रभावित किया है। थाई अमरुद भारतीय अमरुद की तरह स्वादिष्ट और मीठा नहीं है लेकिन लोगों में यह धारणा बनी है कि थाई अमरुद कम मीठा होने के कारण मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए उपयुक्त है जिसके कारण इसकी मांग बढ़ रही है।

ललित किस्म को पूरा या कत कर खाया जाता है। इसके अलावा प्रसंस्करण उद्योग में इसकी भारी मांग है। इसके गुलाबी रंग के गुदे से कई प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। ललित से को जूस तैयार किया जाता है उसकी भरी मांग है। पिछले एक दशक से देश के अलग अलग हिस्सों में ललित के बाग लगाए गए हैं। यह किस्म सघन बागवानी के लिए भी बहुत उपयुक्त है। अरुणाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में नलालित के बाग लगाने का कार्यक्रम है।

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