शाह ने चली ऐसी चाल, राजनाथ सिंह को भी नहीं लगी भनक

नई दिल्ली। हाल ही में 19 जून को एक बड़ा फैसला लिया गया। बीजेपी के फैसले से जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पर एक बड़ी गाज गिरी। इसके अंतर्गत था कि बीजेपी ने पीडीपी से अपना समर्थन हटा लिया। यह बड़ा फैसला डोभाल और शाह की बैठक खत्म होने के बाद लिया गया। जिसके बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जो हरकत उस पर हर किसी की नज़र है। साथ ही इस बैठक को लेकर ओवैसी भी बहुत धबराए हुए से नज़र आ रहे हैं। अपने एक बयान में उन्होंने शाह और डोभाल के बीच हुई वार्तालाप को सार्वजनिक करने का आग्रह किया है।

खबरों की माने तो जैसे ही बीजेपी ने समर्थन वापस लेने का ऐलान किया वैसे ही राजनाथ सिंह अपना दफ्तर छोड़कर अधिकारिक आवास की ओर चल पड़े। उनकी इस हरकत के पीछे कहा जा रहा है कि गृहमंत्री ने सवालों से बचने के लिए यह कदम उठाया, क्योंकि इससे पहले उन्हें की जानकारी नहीं थी कि पार्टी ऐसा भी कोई कदम उठा सकती है। साथ ही जम्मू-कश्मीर के वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा को भी इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। इस पूरे घटनाक्रम पर जब उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा, “मैं इस वक्त श्रीनगर में हूं, मुझे तुरंत इसकी जानकारी मिली है, मैं कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकता हूं।”

राजनाथ सिंह को इस बात की जानकारी नहीं थी इस बात को लेकर कई अधिकारियों ने भी बड़े-बड़े बयान दे डालें। किसी ने कहा कि राजनाथ सिंह केवल कागज़ों में ही नंबर दो हैं ऐसे शायद ही उन्हें पार्टी ने कोई तवज्जो दिया हो। आगे अधिकारियों ने कहा कि मोदी-शाह ने राजनाथ सिंह को बिल्कुल अलग तो नहीं रखा है, लेकिन साथ भी नहीं, बस कागज़ी तौर पर उन्हें नंबर दो का स्थान दिया गया है।

बता दें आंतरिक सुरक्षा और जम्मू-कश्मीर से जुड़े हर फैसले इस समय सलाहकार ही ले रहे हैं। जिसके बाद से कहा जा रहा है कि गृह मंत्रालय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल पीएम मोदी के आंख और कान हैं। खबरों के मुताबिक डोभाल और आर्मी चीफ विपिन रावत संघर्ष विराम बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे वहीं कश्मीर के वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा इसके विपरीत थे। उनके मुताबिक इस सीज़फायर को और आगे बढ़ाना था।

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