ताज महल बनाम तेजोमहालय की जंग में हुई शाहजहां की जीत, केंद्र ने ख़ारिज की मांग

आगरा: ताज महल को तेजोमहालय बनाते वाले हिंदूवादी समूह को एक तगड़ा झटका उस वक्त लगा जब उनकी ओर से अदालत में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने उनके सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ताज महल बनाम तेजोमहालय मामले में केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष कहा कि ताज के बंद हिस्सों की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी कराने का कोई औचित्य नहीं है।

तेजोमहालय

 

तेजोमहालय की मांग करने वाले समूह की याचिका के खिलाफ बयान देते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि यह मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया गया मकबरा है। दूसरे पक्ष ने इसके तेजोमहालय होने के संबंध में कोर्ट में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है।

केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता विवेक शर्मा ने कहा कि ताजमहल के संबंध में सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर जारी है। इसके बाद इसके बंद हिस्सों की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी कराए जाने का न तो कोई औचित्य है और न ही यह संभव है।

अगर तेजोमहालय पक्ष के पास कोई साक्ष्य है, तो वह कोर्ट के सामने प्रस्तुत करे। यह जवाब उस याचना के संबंध में दिया गया जिसमें कहा गया था कि ताजमहल के बंद हिस्सों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाए तो इसके तेजोमहालय यानि मंदिर होने का सच सामने आ जाएगा।

उधर, तेजोमहालय पक्ष के अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने लोहामंडी के नया बांस निवासी इफ्तिखार खान के पत्र पर आपत्ति की। इस पत्र में ताज महल को सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताते हुए वक्फ बोर्ड का रजिस्टर तलब करने की याचना की गई थी।

केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने इस याचना पर अपना जवाब देने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए चार अप्रैल की तारीख नियत की है।

आपको बता दे कि हिंदूवादी संगठनों द्वारा तरह-तरह के उदाहरण देकर पिछले काफी समय से ताज महल को एक शिवमंदिर बताया जा रहा है। इन सगठनों का कहना है कि पुराने समय में यहां एक शिव वाटिका और शिव मंदिर था। वाटिका को उखड़वाकर शाहजहां ने शिवमंदिर के स्थान पर ताज महल का निर्माण करवाया था। कई हिन्दूवादी लोगों का कहना है कि यहां अभी भी शिवलिंग और मंदिर के अवशेष देखने को मिलते हैं।

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