खुद को हीरो लायक न मानने वाला बन गया बॉलीवुड का बादशाह

srk_640x480_71440678856नई दिल्ली। चमचमाता शहर मुंबई और इस शहर में एक तन्हा नौजवान। एक ऐसा बेटा जिसने अभी-अभी अपनी मां को खोया था। एक ऐसा भाई जिसके सिर पर अपनी इकलौती बहन की जिम्मेदारी थी और एक ऐसा प्रेमी जो अपनी माशूक के इश्क में जज्बातों के बवंडर से जूझ रहा था। ये कहानी करीब 25 साल पुरानी है जब बॉलीवुड के रेगिस्तान में शाहरुख खान तन्हा खड़े थे लेकिन उनके साथ वो गुस्सा भी था जो उन्हें कुछ कर गुजरने के लिए उकसा रहा था।

साल की उम्र में अपने पिता और 25 साल की उम्र में अपनी मां को खो देने वाले सुपरस्टार शाहरुख खान की जिंदगी में 1990 का यही वो वक्त भी था जब उनकी आजमाइश भी अपनी आखिरी सांसे गिन रही थी। मायानगरी मुंबई में कदम रखते ही शाहरुख खान की तकदीर का सूरज चमकने वाला था लेकिन जैसा की हर कामयाबी अपनी कीमत चाहती है शाहरुख को भी वो कीमत चुकानी पड़ी हैं जिसने उन्हें आज बॉलीवुड का बेताज बादशाह बना दिया है।

शाहरुख जब पंद्रह साल के थे तब उनके पिता का कैंसर की बीमारी की वजह से इंतेकाल हो गया था। शाहरुख अभी स्कूल में ही पढ़ रहे थे लिहाजा परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर थी। स्कूल की पढ़ाई खत्म कर शाहरुख कॉलेज में पहुंचे और डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनीवर्सिटी में जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन के कोर्स में दाखिला ले लिया था। जाहिर है शाहरुख का मकसद साफ था वो फिल्में बनाना चाहते थे। लेकिन उनकी मां रुखसाना का ख्वाब था कि बेटा दिलीप कुमार की तरह बॉलीवुड का बड़ा सुपरस्टार बने।

शाहरुख ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा, ”90 में एक साल मुंबई आया। अभी 25 साल हो गए फिर मेरा कुछ ऐसा आईडिया नहीं था कि मैं एक्टर बनुंगा मुझे फिल्म बनाने का शौक था, मैं जब मास कॉम कर रहा था तो उस वक्त फिल्म मेकिंग कोर्स भी था तो मेरा शौक था कि मैं वो बनाऊं, एड और शॉर्ट फिल्म बनाऊं मुझे ऐसा नहीं था कि कॉमर्शियल हिंदी सिनेमा में आऊंगा।”

शाहरुख ने आगे कहा, ”हां आई वांट टू डॉयरेक्ट, ऐसा कोई शौक नहीं था कि मैं फिल्मों में एक्टर बनुंगा। मुझे लगता ही ऩहीं था कि मैं बनूंगा, मुझे याद आया कि मेहमूद साहब हमारे बहुत क्लोज थे। बैंगलौर में उनके बेटे थे। फिल्म ‘महकी’ और ‘कुंवारा बाप’ में भी थे तो उन्होंने मुझे कहा कि तुम्हारी शक्ल अच्छी नहीं है तुम फिल्मों में हीरो बनोगे भी नहीं। मुझे लगा कि यार मेरी शक्ल ठीक नहीं है तो मैं क्या हीरो-वीरो का रोल करुंगा सो आई नेवर थॉट टू बीइंग इन फिल्म। इस तरह से खुद को हीरो लायक ना मानने वाला यह लड़का बॉलीवुड का बेताज बादशाह बन गया और आज करोड़ों के दिलों पर राज कर रहा है।

 

(एबीपी न्‍यूज से साभार)

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