यह दिग्गज नेता बना विपक्षी एकता का सूत्राधार, भाजपा के उड़े होश

नई दिल्ली: अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में केंद्र की सत्तारूढ़ मोदी सरकार सरकार का असली मुकाबला एक एक दल से नहीं बल्कि एकजुट नजर आ रही विपक्षी एकता से है। विपक्ष के सभी दल आपस में महागठबंधन कर मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने की कवायद में जुटे हैं। हालांकि अभी तक इस विपक्ष खुद को साथ लाने की कवायद में जुटी है। लेकिन अब इस विपक्षी एकता को सूत्राधार मिल गया है। यह सूत्राधार कोई और नहीं बल्कि वही नेता है जिसने बीते दिनों राहुल गांधी को मोदी सरकार को हारने के टिप्स दिए थे।

दरअसल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने केंद्र के नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी एकजुटता का सूत्रधार बनने के लिए हामी भर दी है। यह बड़ी जिम्मेदारी उठाते हुए उन्होंने विपक्ष को एक मंच पर आने का आह्वान भी कर दिया है। उन्होंने कहा है कि देश में 1977 जैसी स्थिति है जब विपक्षी दलों के गठबंधन ने इंदिरा गांधी को सत्ता से बेदखल कर दिया था।

जिस तरह से महाराष्ट्र परिषद चुनाव के दौरान नासिक सीट पर भाजपा को एनसीपी का साथ मिला था, उसे भाजपा की एक बड़ी जीत बताई जा रही थी लेकिन अब जब खुद एनसीपी अध्यक्ष ही मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के सूत्राधार बन गए है, इससे भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरे जरूर आ गई होगी ।

मिली जानकारी के अनुसार, बीते सोमवार को विपक्षी एकता का सूत्राधार बनने की हामी भरने के बाद शरद पवार ने कहा कि हालिया उप चुनावों में भाजपा का खराब प्रदर्शन कोई छोटी चीज नहीं है।  उन्होंने कहा कि ज्यादातर उप चुनाव परिणाम सत्तारूढ़ पार्टी (भाजपा) के खिलाफ गए हैं। यह कोई छोटी चीज नहीं है। उन्होंने यह बात भंडारा-गोंदिया से अपनी पार्टी के नवनिर्वाचित सांसद मधुकर कुकडे से मुलाकात के बाद कही।

पवार ने संवाददाताओं से कहा कि पूर्व में ऐसे अवसर रहे हैं जब उपचुनावों में मिली हार का नतीजा उस समय की मौजूदा सरकार की हार के रूप में निकला।  उन्होंने 1977 को भी याद किया जब विपक्षी एकता का परिणाम इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की हार के रूप में निकला था और कहा कि उसी तरह की स्थितियां अब बन रही हैं।

शरद पवार ने कहा कि राज्यों में मजबूत मौजूदगी रखने वाले दलों (जैसे कि केरल में वाम, कर्नाटक में जेडीएस, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र में कांग्रेस, आंध्र प्रदेश में तेदेपा, तेलंगाना में टीआरएस, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और महाराष्ट्र में राकांपा) को एक आम सहमति बनाने की आवश्यकता है। पिछले हफ्ते विपक्षी दल लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में 14 सीटों में से 11 पर विजयी बनकर उभरे थे और सत्तारूढ़ पार्टी तथा इसके सहयोगी तीन सीटों तक सिमटकर रह गए थे।

 

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