पवार ने बीजेपी पर साधा निशाना कहा, देश इन ताकतों को उखाड़ फेंकने की तैयार में है

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नई दिल्ली : राकांपा के अध्यक्ष शरद पवार ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए बुधवार को यहां कहा कि देश आने वाले संसदीय चुनाव में सांप्रदायिक ताकतों को उखाड़ फेंकने की तैयारी में है।

उन्होंने यहां अपनी पार्टी के एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा, “मैं राजग सरकार की नीतियों और कार्यों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हूं, जो न केवल विभाजनकारी, विनाशकारी और विध्वंसकारक प्रचार करती है, बल्कि देश की अखंडता के लिए भी एक खतरा है।”

पवार ने देश के सांप्रदायिक राजनीति की गिरफ्त में होने का दावा करते हुए कहा कि दक्षिणपंथियों ने सांप्रदायिकता और विकास के बीच कोई विरोधाभास नहीं देखा है।

उन्होंने कहा, “उनका मानना है कि सांप्रदायिकता भारत के सबसे बड़े समूह को एकजुट करेगी और जब अल्पसंख्यक उन्हें एकजुट होते हुए देखेंगे, तब वे मुख्यधारा में राजनीतिक रूप से छोटे भागीदारों के रूप में शामिल होंगे। हमारा देश विभिन्न संस्कृतियों, संप्रदायों व धर्मों का राष्ट्र है, जो केवल मानवता के धर्मनिरपेक्ष सार के साथ एकजुट रह सकता है। ‘एक धर्म, एक राष्ट्र’ का सिद्धांत बेतुका है और भारत के संदर्भ में अव्यवहारिक है।”

उन्होंने कहा, “हम एक ऐसे वर्ष में हैं, जब देश सांप्रदायिक ताकतों को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार है, जो केंद्र की सत्ता पर काबिज है।” उन्होंने घोषणा की कि राकांपा हमेशा धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक भारत के प्रति बचनबद्ध रही है।

कृषि व रोजगार जैसे अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में सरकार के प्रदर्शन और नोटबंदी से हुए आर्थिक नुकसानों पर हमला बोलते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अब हम इस स्थिति को और आगे जारी नहीं रख सकते। उस देश का भविष्य क्या हो सकता है, जहां डर का माहौल बढ़ रहा हो, जहां लोग बेरोजगारी के अधीन हो रहे हों, जहां किसान और मजदूर व्यवस्थित रूप से गरीब हो रहे हों, जहां कुछ चुनिंदा लोगों के लाभ के लिए अर्थव्यवस्था का उपयोग किया जा रहा हो?”

उन्होंने कहा, “हमें अपने मतभेदों को खत्म करना होगा और भय, सांप्रदायिकता व अवसरवाद के इस शासन को समाप्त करने के लिए एक संयुक्त लड़ाई लड़नी होगी।”

पवार ने कहा, “भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में किए सभी वादों को पूरा नहीं किया। लोग उनके झूठे वादों से परेशान हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में हालिया उप-चुनावों ने मोदी सरकार के खिलाफ लोगों के फैसले को दिखाया है।”

राकांपा प्रमुख ने कहा कि बढ़ते आतंकवाद के साथ कश्मीर घाटी में अभूतपूर्व बंदी, सड़क पर विशाल प्रदर्शन और सीमा पार रोजाना गोलीबारी को संवाद की कमी से जोड़ा जा सकता है।

उन्होंने मोदी सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया और उत्पादन लागत पर 150 प्रतिशत तक कृषि फसलों की कीमतों में वृद्धि करने के उनके दावे को आंख में धूल झोंकने वाला करार दिया।

उन्होंने कहा कि 2016 में नोटबंदी के आर्थिक नुकसान ने पूरे देश को अत्यधिक तनाव में डाला हुआ है।

पवार ने कहा कि मात्र दो वर्षों में अर्थव्यवस्था आठ फीसदी की दर से आगे बढ़ रही थी, मुद्रास्फीति नियंत्रण में था, एफडीआई आ रही थी और बाजार में तेजी थी। “इसे फिक्सिंग की आवश्यकता नहीं थी। इसे और गति देने की आवश्यकता थी और यह सुधारों के लिए तैयार थी।”

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उन्होंने कहा, “लेकिन मोदी ने अपने शानदार विचारों के साथ निर्णय लिया, जिससे देश संकट में आ गया।”

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