किसान आंदोलन पर शिवसेना ने भाजपा को घेरा

किसानों का आंदोलन लगातार 12वें दिन भी जारी है किसानों की मांग है कि तीनों कानूनों को निरस्त किया जाए।

नई दिल्ली: संसद द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार 12वें दिन भी जारी है। किसानों की मांग है कि तीनों कानूनों को निरस्त किया जाए। इस आंदोलन को विपक्षी पार्टियों को समर्थन मिल रहा है। ऐसे में शिवसेना ने भी केंद्र सरकार को घेरा है। अपने मुखपत्र सामना में पार्टी ने कहा कि सरकार बातचीत के नाम पर सिर्फ टाइमपास कर रही है और टाइमपास का उपयोग आंदोलन में फूट डालने के लिए किया जा रहा है।

पार्टी ने सामने में लिखा,दिल्ली में आंदोलनकारी किसान और केंद्र सरकार के बीच पांच दौर की चर्चा परिणाम रहित रही है। किसानों को सरकार के साथ चर्चा में बिल्कुल भी दिलचस्पी नजर नहीं आ रही है। सरकार सिर्फ टाइमपास कर रही है और टाइमपास का उपयोग आंदोलन में फूट डालने के लिए किया जा रहा है। किसान आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा है कि ‘कृषि कानून रद्द करोगे या नहीं हां या ना, इतना ही कहो!’ सरकार ने इस पर मौन साध रखा है। किसान 11 दिनों से ठंड में बैठे हैं।

किसान आंदोलन पर शिवसेना ने क्या कहा 

शिवसेना का कहना है कि केवल कृषि मंत्री किसानों से बात कर रहे हैं। सामना में लिखा, ‘सरकार ने किसानों के लिए चाय-पानी भोजन का इंतजाम किया है। उसे नकारकर किसानों ने अपनी सख्ती को बरकरार रखा है। मूलरूप से किसानों को कह कौन रहा है तो कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर। उनके हाथ में क्या है तोमर कहते हैं,मोदी सरकार सत्ता में किसानों के हित के लिए ही काम कर रही है। इस सरकार के कारण किसानों का उत्पन्न भी बढ़ गया है।’ तोमर ऐसा भी कहते हैं कि, ‘एमएसपी’ जारी ही रहेगी। किसान चिंता न करें। परंतु तोमर का बोलना व डोलना निष्फल सिद्ध हो रहा है।

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