सभी समाजवाद शत्रु चंद्रशेखर आजाद के घोर विरोधी: शिवपाल यादव

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नई दिल्ली। अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती यहां सोमवार को उपनिवेशवाद विरोध दिवस के रूप में मनाया गया। वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवपाल सिंह यादव ने आजाद की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उनके प्रति श्रद्धा प्रकट की।

इस उपलक्ष्य में आयोजित परिचर्चा शिवपाल ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद उपनिवेशवाद के घोर विरोधी और समाजवाद के प्रति प्रतिबद्ध व प्रबल पैरोकार थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्रामी भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, भगवतीचरण वोहरा जैसे क्रांतिधर्मी युवाओं के साथ मिलकर हिंदुस्तान समाजवादी गणतांत्रिक संघ का गठन किया और संस्थापक अध्यक्ष बने। ‘समाजवाद’ के नाम पर भारत में प्रथम संगठन बनाने का श्रेय चंद्रशेखर आजाद को ही जाता है।

उन्होंने कहा कि आजाद के समाजवाद संबंधी रोमानी सपने को बाद में राममनोहर लोहिया ने सैद्धांतिक रूप दिया। बहुत कम लोगों को पता है कि आजाद से प्रभावित होकर ही लोहिया ने सन् बयालिस की क्रांति के दौरान ‘आजाद दस्ता’ का गठन किया था, ताकि भारत में चल रही आजादी की लड़ाई कुंद न हो।

शिवपाल ने कहा कि समाजवाद के शत्रु दरअसल आजाद के विरोधी हैं। आजाद आजादी के बाद जैसा भारत चाहते थे, वैसा भारत अब तक नहीं बन सका है। चंद्रशेखर के सपने आज भी अधूरे हैं। वैश्विक उपनिवेशवाद के कारण भारत व हिंदी को यथोचित सम्मान नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता एवं हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा की दर्जा से वंचित है, जबकि यूएनओ की स्थापना और भारत के आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं।

यादव ने संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटानियो गुटेरेस को साधुवाद देते हुए कहा कि हिंदी में यूएनओ द्वारा खतो-किताबत शुरू करने और ट्विटर व फेसबुक पर आने से हिंदी का वैश्विक सम्मान बढ़ा है, लेकिन आधिकारिक दर्जा प्राप्त होने तक दीपक मिश्र के संयोजन में समाजवादी सतत संघर्ष जारी रखेंगे।

शिवपाल ने कहा कि जो लोग समाजवाद नहीं जानते, भारत व समाजवादी आंदोलन के इतिहास को नहीं जानते, वही लोग ‘समाजवादी’ शब्द को हटाने की बात करते हैं। उन्हें आजाद के समाजवाद को पढ़ना चाहिए। समाजवाद के शत्रु दरअसल आजाद के विरोधी है।

बौद्धिक चिंतन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व समाजवादी चिंतक दीपक मिश्र ने कहा कि देश के इतिहासकारों व बुद्धिजीवियों ने चंद्रशेखर आजाद के साथ काफी अन्याय किया है। उनकी विचारधारा एवं वैचारिक अवदान पर कभी भी विमर्श नहीं किया गया।

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