SIPRI : सांसों को तरसती दुनिया में हर साल बढ़ता जा रहा है मिलिट्री खर्च

स्वीडन : स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक भारत, अमेरिका और चीन के बाद फौजी साज़ोसामान की खरीद फरोख्त में रूपए खर्च करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। 26 अप्रैल को जारी इन आंकड़ों के मुताबिक 2020 में पूरी दुनिया का सैन्य खर्च 1,981 अरब डॉलर था।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट  में कहा गया है कि दुनिया के सैन्य खर्चों में आई ढ़ाई फीसद से ज़्यादा की यह बढ़त तब हुई जब कोविड के मद्देनज़र ग्लोबल जीडीपी में 4.4 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।

SIPRI के मुताबिक पांच देश हैं टॉप मिलिट्री स्पेंडर

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक 2020 में हुआ ग्लोबल मिलिट्री खर्च 1988 के बाद सबसे ज्यादा है। साल 2020 में पूरी दुनिया में होने वाले सैन्य खर्च में भारत की हिस्सेदारी 3.7 फीसदी रही है जो लिस्ट में  यूएस और चाइना को बाद तीसरे पायदान पर है। इस कड़ी में अमेरिका, चीन, भारत, रूस और इंग्लैंड साल के टॉप मिलिटरी स्पेंडर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के कुल सैन्य खर्च में इन पांच देशों की 62 फीसदी हिस्सेदारी है।

जानकारों की माने तो 2019 के मुकाबले 2020 में भारत के सैन्य खर्च में दो फीसद की उछाल दर्ज की गई। इस दौरान भारत का सैन्य खर्च 72.9 अरब डॉलर के करीब था। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत के सैन्य खर्च में हुई बढ़ोत्तरी की वजह चीन और पाकिस्तान के साथ उसका बढ़ता तनाव है।

अमेरिका फिलहाल दुनिया का सबसे बड़ा मिलिटरी स्पेंडर बना हुआ है। साल 2020 के ग्लोबल सैन्य खर्च में अकेले अमेरिका की हिस्सेदारी 39 फीसद थी । इस दौरान अमेरिका ने मिलिटरी पर रिकॉर्ड 778 अरब डॉलर खर्च किये। इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर रहे चीन ने साल 2020 में मिलिट्री पर 252 अरब डॉलर खर्च किये। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आकड़ों पर के मुताबिक चीन पिछले छब्बीस साल से अपना सैन्य खर्च बढ़ाये जा रह है। जिसका असर दुनिया पर एक न एक दिन पड़ने की उम्मीद है।

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