…तो ऐसे बनी रंगभेद का शिकार हुई रेहाना एक फेमस मॉडल

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नई दिल्ली। कहने को तोह बड़ी आज़ादी से कह दिया जाता है कि हम रंगभेद नहीं करते,हम रंग विभेद में विश्वास नही करते हैं। तो क्यों नही हमारे सिनेमा और सीरियल (जिसे समाज का आधा वर्ग देखता है)के नायक और नायका सिर्फ गोर रंगों में होते है,छत्तीसगढ़ के बगीचा की रिनी कुजूर को भी ऐसी ही समस्याओं से दो चार होना पड़ा।

लेकिन उन्होंने समाज को मुंह तोड़ जवाब देते हुए अपना मुकाम बनाया और आज मॉडलिंग की दुनिया की चर्चित हस्ती बन गई हैं। उनका लुक इंटरनेशनल सिंगर रिहाना से मिलता जुलता है इसीलिए उन्हें भारत की रिहाना भी कहा जा रहा है।

भारत में रंग को लेकर फैले रूढ़िवाद के बावजूद रिनी ने अपनी मेहनत औक लगन के दम पर देश-विदेश के मीडिया में अपनी जगह बनाई है। हालांकि उनका अभी भी मानना है कि उनके त्वचा के रंग की वजह से आज भी उनकी प्रतिभा का सही आकलन नहीं किया जाता।

वह कहती हैं, ‘फोटोग्राफर्स अपने क्लाइंट को कहते हैं कि वे रिहाना की तरह एक मॉडल को ला सकते हैं, इसलिए उनके लिए यह आसान हो जाता है क्योंकि फिर कोई ये नहीं कहेगा कि रिहाना खूबसूरत नहीं हैं।’ रिनी बताती हैं कि इस तरह चीजें उनके पक्ष में चली जाती हैं।

वह बताती हैं, ‘मुझे याद है एक बार मेरे पिता से मेरी तस्वीरें मांगी थीं। जब उन्हें पहली फोटो पंसद नहीं आईं तो उन्होंने कहा कि थोड़ी सी गोरी फोटो मिल सकती है क्या। हमारे यहां लोगों की मानसिकता ही ऐसी है।’ अपने बचपन की यादें साझा करते हुए हिंदुस्तान टाइम्स से रिनी ने कहा, ‘बचपन में मुझे याद है मैं एक कॉम्पिटीशन में गई थी।

वहां स्टेज शो हो रहा था। जब मैं स्टेज पर आई तो दर्शकों में से आवाज आई कि देखो, काली परी आ गई। दरअसल वे मेरे रंग का मजाक उड़ा रहे थे।’ एक बार उनके किसी दोस्त ने कहा कि वह इंटरनेशनल आईकन रिहाना की तरह लगती हैं।

लेकिन इस बात को रिनी ने गंभीरता से नहीं लिया और उस दोस्त की बात पर हंस पड़ीं। लेकिन कुछ ही दिनों में उन्हें हर किसी के मुंह से यही सुनने को मिल रहा था। इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला कर लिया।

मॉडलिंग की दुनिया में जाने का सपना देखने वाली रिनी को अधिकतर मौकों पर हताश होना पड़ा। इस क्षेत्र में उन्हें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनसे शारीरिक संबंध बनाने को कहा गया। वह बताती हैं कि मॉडलिंग की दुनिया में अधिकतर लोग यही कहते थे कि जब तक आप क्लाइंट्स को ‘खुश’ नहीं करेंगी तब तक आपको काम मिलना मुश्किल है।

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