तो इस वजह से केजीएमयू को अलविदा कह रहे चिकित्सक

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लखनऊ। देश में शीर्ष चिकित्सा शिक्षा संस्थान होने का दावा करने वाले केजीएमयू प्रशासन से तंग आकर चिकित्सा विश्वविद्यालय के चिकित्सक केजीएमयू छोड़ रहे हैं। इसका कारण विभाग में हावी गुटबाजी और चिकित्सक कार्य का अधिक होना बताया जा रहा है। यही कारण है कि पीजीआई के समान वेतन भत्ता होने के बावजूद केजीएमयू के चिकित्सक विवि छोड़कर जा रहे हैं।
डॉक्टरों के जाने से केजीएमयू की साख को भी धक्का लग रहा है वहीं कुलपति पर भी प्रश्नचिन्ह उठ रहा है। सरकार हर साल 910 करोड़ रुपये का बजट दे रही है। उसके बावजूद केजीएमयू प्रशासन डॉक्टरों को संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं। हर विभाग में बदइंतजामी व गुटबाजी हावी है जिसके कारण एक वर्ष के भीतर दर्जनभर से ज्यादा चिकित्सक केजीएमूय को अलविदा कह चुके हैं। कई चिकित्सकों ने कुलपति प्रो.एम.एल.बी. भट्ट पर भेदभाव करने का भी आरोप लगाया है। प्रो. भट्ट के कार्यकाल में पूरी व्यवस्था भ्रष्ट है।
हालात है कि नेफ्रोलॉजी विभाग में जरूरत के हिसाब से डॉक्टरों की तैनाती की मांग उठी थी। इसके बावजूद केजीएमयू प्रशासन ने नियमित डॉक्टर की बात तो दूर अतिरिक्त रेजीडेंट तक नहीं दिया। वहीं डेंटल विभाग में पद से ज्यादा रेजीडेंट की तैनाती की गई। इस तरह की नीतियों से ऊबकर डॉक्टर केजीएमयू छोड़ रहे हैं। केजीएमयू में गेस्ट्रो सर्जन डॉ. साकेत कुमार के बाद अब कॉर्डियो थोरैसिक वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के डॉ. विजयंत देवनराज ने भी इस्तीफा दे दिया है। एक निजी अस्पताल में उन्होंने नौकरी ज्वाइन भी कर ली है।
सीटीवीएस विभाग में पहले छह डॉक्टर थे। इनमें पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. शेखर टंडन निलंबित चल रहे हैं। डॉ. विवेक दो साल से प्रशिक्षण पर बाहर हैं। इस विभाग के एक डाक्टर शैलेन्द्र कुमार यादव को वापस जनरल सर्जरी में भेज दिया गया है। मौजूदा समय में विभागाध्यक्ष डॉ. एसके सिंह और डॉ. सर्वेश ही सीवीटीएस विभाग में बचे हैं। वहीं वस्कुलर सर्जरी विभाग के डॉ. अम्बरीश कुमार को सीटीवीएस विभाग में शिफ्ट किया गया है।
गत 14 मार्च को सीटीवीएस विभाग के डॉ. विजयंत ने इस्तीफा दे दिया है। डॉ. विजयंत ने 2009 में केजीएमयू में एमसीएच में दाखिला लिया था। 2012 में कोर्स पूरा किया। एमसीएच के बाद एक साल बतौर सीनियर रेजीडेंट तैनात रहे। 2013 में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर सीटीवीएस विभाग में नौकरी ज्वाइन की। 2016 में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नति मिली।  बीते कुछ समय से विभाग में उठा-पटक चल रही है। विभागाध्यक्ष के पद से लेकर दूसरी बातों को लेकर विवाद चल रहा है। डॉक्टर के जाने से मरीजों को खासी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। ऑपरेशन के लिए मरीजों को और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
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