नागा बाबा (Naga Baba) से जुड़ी ये रहस्यमयी बातें आपको कोई नहीं बताएगा

पूरे भारत में 13 ऐसे अखाड़ें हैं जहां सन्यासियों को नागा साधु बनाया जाता है। आम आदमी से नागा साधू बनना काफी मुश्किल होता है, इतना ज्यादा मुश्किल जिसे हम और आप सोच भी नहीं सकते।

नई दिल्ली: हरिद्वार में कुंभ मेला के शुरू होते ही नागा बाबा नजर आने लगते हैं। यहां सैंकड़ों की तदाद में नागा बाबा आते हैं और शाही स्नान करते हैं। 14 जनवरी से हरिद्वार में कुंभ मेला शुरू हो चुका है। वैसे तो कुंभ मेला 12 साल बाद आता है लेकिन इस बार ग्रहों की स्थिति के एक साल पहले मनाया जा रहा है।

नागा साधु बनने के लिए भारत में हैं 13 अखाड़ें

बता दें कि पूरे भारत में 13 ऐसे अखाड़ें हैं जहां सन्यासियों को नागा साधु बनाया जाता है। आम आदमी से नागा साधू बनना काफी मुश्किल होता है, इतना ज्यादा मुश्किल जिसे हम और आप सोच भी नहीं सकते। कहा जाता है कि ये हिमालय में जीरो डिग्री से भी नीचे के तापमान में जिंदा रह सकते हैं। पूरी तरह से नग्न होने के कारण इन नागा बाबा को दिगंबर भी कहा जाता है। जब भी कोई इंसान साधु बनने के लिए आता है , तो अखाड़ा सबसे पहले उसके बारे में सारी पड़ताल करता है जैसे कि वो साधु बनने के काबिल है कि नहीं आदि। अगर उन्हें लगता है कि ये आदमी साधु बनने के काबिल है तभी वो उसे अखाड़ा में शामिल होने की इजाजत देते हैं।

नागा बाबा बनने में लग सकता है 12 साल?

अखाड़ा में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले उस आदमी की ब्रह्माचर्य की परीक्षा ली जाती है। इस परीक्षा में 8 महीने से लेकर 12 साल तक लग जाते हैं। इसके बाद जब उस व्यक्ति के गुरू को लगता है कि अब ब्रह्माचर्य बन चुका है तो उसे दीक्षा दी जाती है।

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खुद का करना होता है श्राद्ध और पिंडदान

इसके बाद व्यक्ति से महापुरुष बनने के बाद उसके पांच गुरु बनाए जाते हैं जैसे शिव, विष्णु, सूर्य और गणेश। गुरू बनाने के बाद साधुओं को अपने बाल, कपड़े आदि दान करने पड़ते हैं और गंगा में 108 डुबकी लगानी पड़ती है। उसके बाद उन्हें खुद ही अपने परिवार और समाज के लिए मृत मानकर खुद का श्राद्ध और पिंडदान करना पड़ता है।

इस प्रक्रिया के बाद बनते हैं दिगंबर

इतना ही नहीं इन  सारी प्रक्रियाओं को करने के बाद साधुओं को नग्न अवस्था में 24 घंटे तक अखाड़ के ध्वज के नीचे खड़ा रहना होता है। इसके बाद वरिष्ठ नागा साधु लिंग की एक विशेष नस को खींचकर उसे नपुंसक कर देता है जिसके बाद वो पूरी तरह से नागा दिगंबर साधु बन जाता है।

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7 घर से मांगनी पाड़ती है भिक्षा

नागा बाबा को दो वक्त का खाना खाने की अनुमति नहीं होती है। वो सिर्फ एक वक्त ही खाना खा सकते हैं वो भी सिर्फ 7 घरों से भिक्षा मांग कर। इसका मतलब कि अगर उन्हें 7 घरों में भिक्षा मांगने पर नहीं मिली तो फिर उन्हें पूरा दिन भूखा रहकर बिताना पड़ता है।नागा बाबाओं को वस्त्र पहनने की भी आजादी नहीं होती है। अगर उन्हें वस्त्र पहनना भी है तो वो सिर्फ गुरुआ रंग का ही वस्त्र पहन सकते हैं।

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