इसरो- चंद्रयान-2 लैंडर को ‘विक्रम’ नाम देने के प्रस्ताव पर अंतरिक्ष विभाग ने दी मंजूरी

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बेंगलु| भारत के अंतिरक्ष मार्गदर्शक विक्रम साराभाई की 99वीं जयंती के उपलक्ष्य पर सरकार के स्वामित्व वाले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को यहां अपने मुख्यालय में उनकी अर्धप्रतिमा का अनावरण किया। अंतरिक्ष एजेंसी के पूर्व अध्यक्ष के. कस्तूरीरंगन एवं ए. एस. किरण कुमार और वर्तमान अध्यक्ष के. सिवान इस मौके पर यहां अंतरिक्ष भवन में मौजूद थे।

साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 में गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। उनका निधन 52 वर्ष की उम्र में केरल के तिरुवनंतपुरम में 30 दिसंबर, 1971 में हुआ था। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक के रूप में साराभाई ने 1947 में अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित की थी, जिसे इसरो की पूर्ववर्ती कहा जाता है।

सिवान ने कहा, “साराभाई ने असमानता को कम करने के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को चुना। उनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में भारत ने वह चीज हासिल की, जिसकी उसने कल्पना की थी।” अंतरिक्ष एजेंसी साराभाई की 2019 में 100वीं जयंती के मौके पर पूरे साल अंतरिक्ष संबंधी गतिविधियां कर मनाएगी।

सिवान ने कहा, “शताब्दी महोत्सव मनाने के लिए देश भर में ज्ञान केंद्र खोले जाएंगे और अंतरिक्ष विज्ञान में नवाचार के लिए छात्रवृत्ति, अधिछात्रवृत्ति और साराभाई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।” चंद्रयान -2 लैंडर को ‘विक्रम’ नाम देने के प्रस्ताव पर अंतरिक्ष विभाग ने अपनी मंजूरी दे दी है।

सिवान ने जोर देकर कहा, “हम अपने अंतरिक्ष मिशन के माध्यम से साराभाई को सच्ची श्रद्धांजलि पेश कर सकते हैं, हम अगले पांच महीनों में नौ मिशन लॉन्च करेंगे, जिसमें एक महीने में कम से दो अभियान शामिल होंगे।”

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