नवरात्रि के दौरान देवीपाटन मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए खास इंतजाम

देवीपाटन मंदिर
देवीपाटन मंदिर

बलरामपुर: उत्तर प्रदेश में बलरामपुर के तुलसीपुर मे स्थित 51 शक्तिपीठो मे एक देवीपाटन मंदिर में 17 अक्टूबर से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्रि के मौके पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए है।

स्कंद पुराण के अनुसार प्रजापति दक्ष के यज्ञ कुंड मे माता सती ने भगवान शिव के अपमान से आहत होकर प्रवेश कर अपने शरीर को त्याग दिया था। यह सुनकर भगवान शिव यज्ञ स्थल पर आ पहुचे और उन्होने अपने कंधो पर माता सती का शरीर रखकर इधर से उधर घुमाना शुरू कर दिया। इससे सृष्टि के संचालन मे बाधा उत्पन्न होने लगी।

देवताओ के आवाह्नन पर भगवान विष्णु ने अपने चक्र से माता सती के शरीर को खंडित कर गिराना शुरू किया। जिन 51 स्थानो पर सती के अंग गिरे वह सभी शक्तिपीठ कहलाए। देवीपाटन मे सती का वाम स्कंध(बांया कंधा) पट सहित गिरा जिससे यह स्थल सिद्धपीठ देवीपाटन के रूप मे विख्यात हुआ।

देवीपाटन मंदिर प्राकृतिक छटा के बीच बसा ऐसा धार्मिक स्थल है,जहाँ आज भी पशु पंक्षियो को मंदिर मे चढाए गये प्रसाद को खिलाने के बाद ही भक्तो मे बाटने की परम्परा है। दरअसल ऐसा इस मान्यता के तहत किया जाता है कि ईश्वर का वास मनुष्य ही नही पशु पंक्षियो और संसार के कण कण मे है। जिस कारण यह प्रथा सदियो से चली आ रही है।

शारदीय नवरात्रि मे यहाँ देश विदेश से भारी संख्या मे श्रद्धालु आते है। चैत्र नवरात्रि मे मंदिर क्षेत्र मे एक माह तक भव्य मेले का आयोजन होता है। देवी पाटन मंडल का सृजन इसी मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को देख कर किया गया है। वर्तमान मे इस मंडल मे बलरामपुर,गोंडा,श्रावस्ती और बहराइच जिले शामिल है।

चैत्र नवरात्रि पर आयोजित होने वाले मेले को राज्य सरकार ने राजकीय मेला का दर्जा प्रदान कर रखा है। वैश्विक महामारी कोरोना को देखते हुए इस बार शारदीय नवरात्रि के मौके पर मंदिर मे आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किये है। सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर को पुलिस और खुफिया एजेंसियो के हवाले कर दिया गया है। सूबे के मुख्यमंत्री योगीआदित्यनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर होने के चलते जिला प्रशासन मंदिर और उसके आसपास होने वाले हर गतिविधि पर अपनी पैनी नजरे जमाए हुए है।

 

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