हेमंत सरकार का बड़ा फैसला, राज्य के 20 जिलों में स्पेशल एससी-एसटी कोर्ट

ज्य के रांची, हजारीबाग, धनबाद और देवघर में पहले से ही विशेष न्यायालय का गठन किया जा चुका है। इन न्यायमंडलों को छोड़कर अन्य 20 न्यायमंडलों में विशेष न्यायालय

रांची: झारखंड में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ‘एससी-एसटी’ (अत्याचार निवारण)  अधिनियम के अधीन दर्ज वादों के त्वरित निवारण के लिए रांची, हजारीबाग, धनबाद और देवघर को छोड़ कर सभी न्यायमंडलों में विशेष न्यायालय गठित किए जाएंगे.

राज्य के रांची, हजारीबाग, धनबाद और देवघर में पहले से ही विशेष न्यायालय का गठन किया जा चुका है. इन न्यायमंडलों को छोड़कर अन्य 20 न्यायमंडलों में विशेष न्यायालय के गठन को लेकर विधि विभाग के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आज मंजूरी दे दी है.

राज्य के 24 न्यायमंडलों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कुल 1953 वाद लंबित हैं. इस साल 31 जुलाई तक बोकारो में 30,  चतरा में 51,  चाईबासा में 34,  पलामू में 218,  देवघर में 77,  धनबाद में 321,  दुमका में 46,  गढ़वा में 138,  गिरिडीह में 163,  गोड्डा में 71,  गुमला में 61,  हजारीबाग में 208,  जमशेदपुर में 39,  जामताड़ा में 42,  खूंटी में 9,  कोडरमा में 5,  लातेहार में 51, लोहरदगा में 27,  पाकुड़ में 28,  रामगढ़ में 58,  रांची में 187,  साहेबगंज में 60,  सरायकेला में 24 और सिमडेगा में 5 वाद लंबित हैं.

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