विशेष राहत विधेयक संसद में पारित

नई दिल्ली। विशेष राहत (संशोधन) विधेयक, 2017 को राज्यसभा में पारित किए जाने के साथ ही इसे संसद की मंजूरी मिल गई। यह विशेष राहत किसी प्रभावित पक्ष को दिया जाता है, जिसे कार्य को किसी तीसरे पक्ष या अपनी एजेंसी (प्रतिस्थापित प्रदर्शन) द्वारा पूरा करने की व्यवस्था का विकल्प होता है। इस ठेके को दूसरे पक्ष द्वारा नहीं किया जा सकता है।

यह विधेयक विशेष राहत अधिनियम, 1963 को संशोधित करता है, इसे लोकसभा पहले ही पारित कर चुका है और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा। इस विधेयक के तहत राज्य सरकार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श कर कुछ नागरिक अदालतों को बुनियादी परियोजनाओं से जुड़े मामले के निपटारे के लिए विशेष अदालतों के रूप में निर्दिष्ट कर सकती है।

इस तरह के मामलों का अभियुक्त से सम्मन मिलने की तारीख से 12 महीने के भीतर निपटान किया जाना चाहिए। इस अवधि को अदालतों द्वारा छह महीने के लिए और बढ़ाया जा सकता है। अगर अदालत के आदेश से परियोजना के पूरी होने में देरी या बाधा आती है तो यह विधेयक अतिरिक्त रूप से अदालतों को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े ठेके में आदेश देने से रोकता है।

ये परियोजनाएं परिवहन, ऊर्जा, जल व सफाई, संचार व सोशल व वाणिज्यिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी हो सकती हैं, जैसे कि किफायती आवास। केंद्र सरकार इस सूची को अधिसूचना के जरिए संशोधित कर सकती है।

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