बसंत पंचमी पर करें मां सरस्वती की विशेष पूजा, भविष्य बनेगा उज्जवल

लखनऊ: बसंत पंचमी को श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता हैं। इस दिन लोग विद्या की देवी मां सरस्वती (Maa saraswati) की पूजा और अर्चना करते हैं। किसी प्रकार की शिक्षा प्रारंभ करने या किसी नई कला को सीखने की शुरूआत करने के लिए ये दिन बेहद शुभ माना जाता है। क्योंकि इस दिन लोग पीले रंग का वस्त्र धारण कर सरस्वती मां की पूजा करते हैं। और उनसे अपने उज्जवल भविष्य के लिए प्रार्थना करते हैं।

बसंत पंचमी पर शुभ संयोग

इस बसंत पंचमी के दिन रवि और अमृत सिद्धि योग दोनों का खास संयोग बन रहा है। इस दिन पूरे दिन रवि योग रहने से इस दिन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ रहा है। सुबह 06 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक पूजा करने का शुभ मुहूर्त रहेगा।

बसंत पंचमी का क्या है महत्व?

शिक्षा की शुरुआत करने या फिर किसी भी नई कला की शुरूआत करने के लिए ये दिन और माँ सरस्वती (Maa saraswati) का आशीर्वाद दोनों ही शुभ माने जाते हैं। इस दिन बहुत से लोग गृह प्रवेश भी करवाते हैं। माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन कामदेव अपनी पत्नी रति के साथ इस पृथ्वी पर आते हैं। इसलिए मान्यता है कि जो पति-पत्नी इस शुभ दिन पर भगवान कामदेव और देवी रति का पूजन सच्चे मन से करते हैं तो उनके वैवाहिक जीवन के बीच में कभी कोई मुश्किलें नहीं आती हैं। इस दिन माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु का पूजन करने का भी विधान महत्वपूर्ण है।

किस प्रकार करें Maa Saraswati की पूजा-अर्चना?

बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती (Maa saraswati) के रंग जैसे पीले, बसंती या सफेद रंग के ही वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूरब या उत्तर दिशा की ओर खड़े हो कर पूजा प्रारंभ करें। मां सरस्वती को पीला वस्त्र बिछाकर उस पर बैठाएं, और फिर रोली, केसर, हल्दी, चावल, पीले फूल, पीली मिठाई, मिश्री, दही, हलवा आदि सामग्री प्रसाद के रूप में देवी माँ के पास रखें। मां सरस्वती को सफेद चंदन और पीले तथा सफेद पुष्प दाहिने हाथ से चढ़ाएं तत्पश्चात केसर से बनी हुई खीर अर्पित करना अच्छा होगा। हल्दी से बनी हुई माला से मां सरस्वती के मूल मंत्र ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः का जाप करें। शिक्षा मे बाधा का योग हो तो उसे इस दिन विशेष पूजा करके उसको ठीक किया जा सकता। क्योंकि सरस्वती शिक्षा की देवी हैं।

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