रंग भेद के खिलाफ लड़ते हुए 27 साल जेल में बिताए, लोग मनाते है आज उनके लिए International Day

जीवन भर शांति के लिए और रंगभेद के खिलाफ काम किया उनके अतुलनीय संघर्ष के लिए उनके जन्मदिन को इंटरनेशनल डे (International Day) के रूप  में मनाया जाता है।

लखनऊ: नेल्‍सन मंडेला (Nelson Mandela) जिनके विचारों की तुलना, जिनके जीवन की तुलना, जिनके व्‍य‍क्तित्‍व की तुलना भारत के महात्‍मा गांधी से की जाती हैं। मंडेला ने जीवन भर शांति के लिए और रंगभेद के खिलाफ काम किया उनके अतुलनीय संघर्ष के लिए उनके जन्मदिन को नेल्सन मंडेला इंटरनेशनल डे (Nelson Mandela International Day) के रूप  में मनाया जाता है।

इस दिन को लोकप्रिय रूप से 67 मिनट मंडेला दिवस के रूप में जाना जाता है। नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति थे जिन्होंने 67 वर्षों तक सामाजिक न्याय और लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया। पहले बता दें, उन्हें “राष्ट्रपिता” के रूप में जाना जाता है और वे राज्य के पहले ब्लैक हेड थे। उनके योगदान में मानव अधिकार वकील, अंतरात्मा की कैदी, एक अंतरराष्ट्रीय शांतिदूत, और एक स्वतंत्र दक्षिण अफ्रीका के पहले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति के रूप में मानवता की सेवा शामिल है।

क्यो मनाया जाता है Nelson Mandela International Day

यह दिन हर किसी के लिए बदलाव को प्रेरित करने का अवसर है। 1944 में अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस में शामिल होने के बाद नेल्सन मंडेला ने रंगभेद के विरूद्ध आंदोलन छेड़ दिया था। इसी वर्ष उन्होंने अपने मित्रों और सहयोगियों के साथ मिल कर अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग की स्थापना की। 1947 में वे लीग के सचिव चुने गये। 1961 में मंडेला और उनके कुछ मित्रों के विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा चला परन्तु उसमें उन्हें निर्दोष माना गया।

Nelson Mandela International Day
Nelson Mandela International Day

5 अगस्त 1962 को उन्हें मजदूरों को हड़ताल के लिए उकसाने और बिना अनुमति देश छोड़ने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। बता दें, उस वक्त उनपर काफी भरी मुकदमा चला जिस से बच पाना बहुत ही मुशकिल था। उन पर मुकदमा चलाया गया और 1964 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

जेल में लिखे अपनी जीवनी

1964 से 1990 तक रंगभेद और अन्याय के खिलाफ लड़ाई के चलते उन्हें जेल में जीवन के 27 साल बिताने पड़े। उन्हें रॉबेन द्वीप के कारागार में रखा गया था जहां उन्हें कोयला खनिक का काम करना पड़ा था। इस दौरान उन्होंने गुप्त रूप से अपनी जीवनी लिखी। जेल में लिखी गई उनकी जीवनी 1994 में एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई जिसका नाम ‘लॉन्ग वॉक टू फ्रीडम’ है।

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