खेल के सुपरस्टार Boxer Dinko Singh का निधन, एशियाई खेलों में भारत को दिलाया Gold medal

एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता पूर्व भारतीय मुक्केबाज डिंको सिंह का कैंसर से निधन हो गया है, खेल मंत्री कीरेन रीजीजू ने बोला, डिंग्को सिंह के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है

नई दिल्ली: एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता पूर्व भारतीय मुक्केबाज डिंको सिंह (Boxer Dinko Singh) लीवर के कैंसर से लंबे समय तक जूझने के बाद गुरूवार के उनका निधन हो गया है। डिंको 42 साल के थे और 2017 से ही वो इस बीमारी से लड़ रहे थे। खेल मंत्री कीरेन रीजीजू (Kiren Rijiju) डिंको सिंह के निधन से बहुत दुखी है।

कीरेन रीजीजू ने ट्वीट कर बोला, डिंग्को सिंह के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। भारत के अब तक के सबसे बेहतरीन मुक्केबाजों में से एक, 1998 के बैंकाक एशियाई खेलों में डिंको के स्वर्ण पदक ने भारत में बॉक्सिंग चेन रिएक्शन को जन्म दिया। मैं उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व भारतीय मुक्केबाज डिंको सिंह के निधन पर दुख जताते हुए ट्वीट कर लिखा, डिंको सिंह खेल के सुपरस्टार, एक उत्कृष्ट मुक्केबाज थे जिन्होंने कई पुरस्कार अर्जित किए और मुक्केबाजी की लोकप्रियता को आगे बढ़ाने में भी योगदान दिया। उनके निधन से दुखी हूं।

पद्म श्री से सम्मानित

मुक्केबाज डिंको सिंह का जन्म 1 जनवरी 1979 को हुआ था। डिंको एक भारतीय मुक्केबाज थे, जिन्होंने बैंकॉक में 1998 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। वह उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्य मणिपुर से हैं। उन्हें 2013 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। वह भारतीय नौसेना के एक सेवा कर्मी थे। उन्हें 1998 में थाईलैंड में बैंकॉक एशियाई खेलों में मुक्केबाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के लिए जाना जाता है।

डिंग्को की छिपी प्रतिभा की पहचान

भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा शुरू की गई एक विशेष क्षेत्र खेल योजना के प्रशिक्षकों ने डिंग्को की छिपी प्रतिभा की पहचान की, और उन्हें मेजर ओपी भाटिया की विशेषज्ञ देखरेख में प्रशिक्षित किया गया। जो बाद में खेल प्राधिकरण में टीम विंग के कार्यकारी निदेशक बने। डिंग्को की प्रतिभा, प्रयास और प्रशिक्षण का भुगतान तब शुरू हुआ जब उन्होंने 1989 में सिर्फ 10 साल की छोटी उम्र में अंबाला में सब जूनियर नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीती। इस उपलब्धि ने डिंग्को को चयनकर्ताओं और कोचों की नज़रों में ला दिया, जो उन्हें भारत के एक होनहार Boxing स्टार के रूप में देखने लगे।

 

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