Srinagar-Jammu नेशनल हाइवे पांचवें दिन भी बंद, जाम में फंसे हजारों यात्री

कश्मीर घाटी में हो रहे हिमपात और भूस्खलन के कारण 270 किलोमीटर लंबा श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग गुरुवार को लगातार पांचवें दिन बंद रहा।

श्रीनगर: कश्मीर घाटी में हो रहे हिमपात (Snow) और भूस्खलन (Landslide) के कारण 270 किलोमीटर लंबा श्रीनगर-जम्मू (Srinagar-Jammu) राष्ट्रीय राजमार्ग गुरुवार को लगातार पांचवें दिन बंद रहा। यातायात पुलिस के एक अधिकारी ने मीडिया को बताया कि जवाहर सुरंग, शैतान नाला और बनिहाल की दोनों तरफ हुई।

ताजा बर्फबारी और समरोली, नाशरी, केसरिया मोड, सेरी और मैरोग में बारिश के कारण पत्थर गिरने से श्रीनगर-जम्मू (Srinagar-Jammu) राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) रविवार से बंद है। सुरंग के कश्मीर और जम्मू दोनों तरफ के हिस्सों में काफी बर्फ जमा हो गयी है। आगामी तीन दिनों में और अधिक बर्फबारी और भूस्खलन का अनुमान है।

अधिकारी ने बताया कि गर्मियों में श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली 86 किलोमीटर लंबी मुगल रोड भी भारी बर्फबारी (Snowfall) के कारण पिछले तीन से अधिक हफ्तों से बंद पड़ी है, जिसे अगली गर्मियों से पहले खोलने की कोई संभावना नहीं है। सरकार ने लद्दाख को कश्मीर से जोड़ने वाले एकमात्र रास्ते श्रीनगर-लेह राजमार्ग को बर्फबारी के कारण सर्दियों के दौरान बंद रखने की घोषणा पहले ही कर दी है।

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उन्होंने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सीमा सड़क संगठन (BRO) ने राजमार्ग से बर्फ और पत्थरों को हटाने के लिये कर्मचारियों को परिष्कृत मशीनों के साथ काम पर लगा दिया है। उन्होंने एक हादसे में यात्रियों के एक समूह के बाल-बाल बचने की भी जानकारी दी, जिन्हें स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने एक बचाव अभियान चला कर उनके वाहन के साथ सुरक्षित बचाया था।

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राजमार्ग बंद होने से पांच दिनों से हजारों वाहन फंसे

उन्होंने बताया कि राजमार्ग के बंद होने से पिछले पांच दिनों से हजारों वाहन यहां फंसे हुये हैं। राजमार्ग से बर्फ हटाने का काम पूरा होने के बाद फंसे हुये वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जायेगी। इस बीच ड्राइवर और कंडक्टरों ने आरोप लगाया है कि वे ऐसी जगहों पर फंसे हुए हैं जहां पानी, शौचालय और न ही कोई अन्य सुविधा उपलब्ध है। वे शून्य से भी कम डिग्री तापमान में अपने वाहनों में रह रहे हैं। प्रशासन उन्हें मदद देने में पूरी तरह विफल रहा है।

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