अभी तो ये भी बाकी है, पीएम मोदी की कुंडली देख दंग रह जाएंगे आप

नई दिल्ली। बात अगर लक की करें तो सबसे पहले नाम ज़हन में पीएम मोदी का ही आता होगा। आज हम एक ऐसी खबर लेकर आए हैं  जिसे पढ़कर मोदी भक्तों का शायद दिन और भी अच्छा हो जाएगा। हाल ही में पीएम मोदी की कुंडली वायरल हुई जिसके अनुसार उनके किस्मत में अभी और आगे भी राजयोग चलता रहेगा। कहा जा रहा है उनकी कुंडली में अखंड राजयोग है। आने वाला समय भी उनकी इशारों पर चलने वाला है। कुंडली के अनुसार बताया जा रहा है कि पीएम की कुंडली में हारने के योग बहुत ही कम हैं।

आइए दिखाते हैं आपको पीएम मोदी की कुंडली-

तुला लग्न में शुक्र की स्थिति
यह अपने आपमें जबरदस्त रोजयोग कारक है और व्यक्ति को कीचड़ में पैदा होने के बावजूद राजसिंहासन तक पहुँचाने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि नरेंद्र मोदी की कुंडली में बना यह योग उन्हें अभी अखंड राजयोग की स्थिति में रखा है।कहा जा रहा है पीएम के दशम भाव में नीच का मंगल है जिसके कारण पिता के सुख में कमी परन्तु उच्च दृष्टि माँ के स्थान पर अतः माँ की आयु लम्बी और भरपूर आशीर्वाद, साथ ही शत्रुओं को परास्त करने की अद्भुत क्षमता।

छठे भाव में राहु
प्रधानमंत्री की कुंडली में छठे भाव में राहु के होने के कारण शत्रुओं पर जबरदस्त प्रभाव पड़ता है। जिसने भी इनसे शत्रुता की वो गया। यही कारण है कि संजय जोशी, केशुभाई पटेल, और शंकर सिंह बाघेला आज मोदी पर आश्रित हैं।इतना ही नहीं आडवाणी और सुषमा स्वराज को झुकना पड़ा और नितीश, मायावती, मुलायम, अरविन्द केजरीवाल, मणिशंकर अय्यर, सलमान खुर्शीद जैसे न जाने कितने अधिक मोदी का विरोध करने की वजह से राजनैतिक मौत मारे गए।

यहां बैठकर शनि लग्न, पंचम, और अष्टम भाव को सीधे देख रहे हैं। इसलिए देर से विद्या की प्राप्ति, लग्न पर उच्च दृष्टि के कारण निरोगी और आध्यात्मिक विचारधारा, दुखी लोगो के प्रति सेवा का भाव ये सभी गुण प्रदान कर रहा है। साथ ही जीवन में अत्यधिक यात्रा और यात्रा के दौरान सेवा के द्वारा लाभ को दर्शाता है और इन सभी बातों को मोदी के सन्दर्भ में बताने की आवश्यकता नहीं।

द्वादश भाव में केतु, सूर्य, और बुध
जो स्वयं कन्या यानी कि बुध की अपनी राशि में हैं एक साथ युति कर रहे हैं। ऐसा किसी भी व्यक्ति को जबरदस्त योजनाकार, भ्रमणशील, प्रखर वक्ता, धर्म रक्षक और परोपकारी बनाता है। साथ ही यह योग पुनः किसी भी शत्रु के लिए अत्यंत घातक है। सूर्य शुन्य अंश का और पिता का कारक और ग्रहण योग में होने के कारण पिता के सुख में कमी और पैतृक सम्पत्ति तथा पैतृक स्थान के सुख में भारी कमी को दर्शाता है।

पराक्रम भाव अर्थात तृतीय भाव में अपनी ही राशि पर बैठा वक्री गुरु – यह भाई – बहनों के सुख को कमजोर करता है परन्तु अदभुत पराक्रम देता है, मोदी के बारे में ये दोनों ही बातें सर्वविदित हैं। राज्येश चन्द्रमा का भाग्य स्थान यानि नवम भाव में बैठना – यह एक अद्भुत राजयोग है। साथ ही गुरु और चन्द्रमा का दृष्टि योग जबरदस्त पराक्रम, राज क्षमता, सृजनात्मक विचार इन सबसे व्यक्ति को ओतप्रोत बनता है और ये सभी गुण नरेंद्र मोदी में विद्यमान हैं।

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