सोशल मीडिया पर 26 की तबाही के मैसेज महज अफवाह, जानिए असली सच

वात्‍सल्‍य शर्मा

Taiwan Earthquake Kills Thousands

दोपहर ढाई बजे अफगानिस्‍तान के हिन्‍दुकुश में जबरदस्‍त भूकंप आया। इस प्राकृतिक आपदा ने अफगानिस्‍तान से ज्‍यादा पाकिस्‍तान में ताडंव मचाया। देर रात तक 200 लोगों के मरने की सूचना फैल गई। लेकिन इसके साथ ही दोपहर से ही फेसबुक, ट्विटर, वाट्स एप जैसे सोशल प्‍लेटफॉर्म पर एक सूचना चली कि दुनिया के ज्‍यादातर बड़े भूकंप 26 तारीख को ही आए हैं।

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चंद घंटों में हजारों-लाखों ऐसे मैसेज वायरल हो गए। इसके बाद लोगों को यकीन आने लगा कि 26 तारीख का कुचक्र दुनिया के लिए जानलेवा है। लेकिन यह कोरी अफवाह है। यकीन नहीं आता तो आगे पढि़ए।

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वायरल मैसेजेस में बताया गया है कि चीन में 26 जुलाई 1976 को भूकंप आया था। लेकिन सच यह कि साल तो वही था लेकिन तारीख 26 नहीं 28 थी। इसी तरह ताइवान का भूकंप 26 जुलाई 2010 को नहीं बल्कि 4 मार्च 2010 को आया था।

इतना ही नहीं इसी साल नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप काे लेकर वाटसएप, फेसबुक पर मैसेज चले हैं कि इसकी तारीख 26 अप्रैल 2015 है, जबकि यह भूकंप असल में 25 अप्रैल को आया था। यह अलग बात है कि नेपाल भूकंप के झटके कई दिनों तक जारी थे।

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सोशल मीडिया पर उड़ी अफवाहों में 30 हजार लोगों की मौत के जिम्‍मेदार पुर्तगाल भूकंप की तारीख 26 जनवरी 1951 बताई गई है। यह सच है कि वहां 26 तारीख को भूकंप आया था लेकिन साल 1531 की घटना थी। अब इतनी पुरानी घटना को कुचक्र कहना कहां तक ठीक है, आप ही तय करिए।

अफवाहों को खतरनाक बनाने के लिए सिर्फ भूकंप नहीं बल्कि सुनामी का भी सहारा लिया गया है। सोशल मीडिया पर Mentawai Tsunami की तारीख 26 अक्‍तूबर 2010 बताई जा रही है। लेकिन असल में यह 25 अक्‍तूबर को आया था। इसी दिन सुमात्रा में भी समुद्री तूफान उठा था। कुछ तूफान यकीनन 26 तारीख को आए थे, लेकिन इतिहास के पन्‍ने पलटकर देखें तो यह भी साफ हो जाएगा कि कई ऐसी तारीखें हैं, जो प्राकृतिक आपदाओं के लिए कुख्‍यात हैं। इसलिए बेहतर होगा कि पर्यावरण को बचाएं ताकि न इन भूकंप और तूफानों डर रहे न इन तारीखों का।

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