पकिस्तान को तगड़ा झटका… ग्रे लिस्ट में आया नाम, अब सता रहा ब्लैक लिस्ट का डर

नई दिल्ली। आतंक के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया है। पाकिस्तान पर आतंकियों को आर्थिक मदद देने का आरोप है। अब पाकिस्तान में इस बात की दहशत है कि इस कदम के बाद उसे कहीं ब्लैक लिस्ट में ना डाल दिया जाए। इन्ही आरोपों के चलते अमेरिका ने भी पाकिस्तान की आर्थिक मदद पर रोक लगा दी थी।

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आतंक के खिलाफ

बता दें पाकिस्तान को ग्रे सूची में बरकरार रखना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। यह एक राजनीतिक फैसला है और आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के प्रदर्शन का इससे कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस लिस्ट में एक साल या उससे भी अधिक समय तक रह सकता है।

खबरों के मुताबिक़ ब्लैक लिस्ट से बचने के लिए पाकिस्तान ने 15 महीनों के अंदर 26 सूत्रीय एक्शन प्लान भी तैयार किया था बावजूद इसके उसके खिलाफ ये कदम उठाया गया।

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इस एक्शन प्लान में बताया गया है कि आतंकियों को दी जाने वाली आर्थिक मदद को किस प्रकार रोका जाएगा और इसके लिए कौन कौन से कदम उठाए जाएंगे। इसमें मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को दी जा रही आर्थिक मदद पर भी रोक की बात कही गई है।

स्थानीय मीडिया के अनुसार यह फैसला एफएटीएफ की पैरिस में हुई बैठक में बुधवार रात किया गया। उस वक्त वहां पाकिस्तान के वित्त मंत्री शमशाद अख्तर पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। बता दें एफएटीएफ एक अंतर्राज्यीय निकाय है जो धन शोधन तथा आतंकवादी वित्तीयन का सामना करने के लिए मानक निर्धरित करता है। इसकी स्थापना 1989 में हुई थी।

पाकिस्तान द्वारा 26 सूत्रीय एक्शन प्लान जमा करने के बाद ये फैसला सामने आया है। कहा जा रहा है कि ग्रे लिस्ट में आने से पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान पहुंचेगा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी उसकी छवि को आघात होगा। इस स्थिति से बचने के लिए अख्तर ने एफएटीएफ से आग्रह भी किया था कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटा दिया जाए।

पाकिस्तान की 26 सूत्रीय एक्शन प्लान को  एफएटीएफ ने मान लिया। पैरिस में हुई इस बैठक में अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखने का समर्थन किया।

बताया जा रहा है कि इस बैठक में अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के अलावा पाकिस्तान के खास सहयोगी चीन, तुर्की और सऊदी अरब भी मौजूद थे। इन सहयोगियों ने भी इस ग्रे लिस्ट के फैसले का पूर्ण समर्थन किया।

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