# ASK SUNDAR’ सवाल छात्रों के जवाब गूगल सीईओ पिचाई के

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sunder pichaiनई दिल्ली। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई गुरुवार दोपहर दिल्ली यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के बीच थे। उनसे एक स्टूडेंट ने सवाल किया- ‘एंड्रॉइड वर्जन के नाम भारतीय मिठाइयों पर क्यों नहीं होते, जैसे अगला वर्जन एंड्रॉइड नान खटाई क्यों नहीं हो सकता?’ इस पर पिचाई ने कहा- ‘हम अगली बार POLL कराएंगे। भारतीयों ने वोट किया तो नाम यहां की मिठाइयों पर होगा।’

 

क्रिकेटर बनना चाहता था

– पिचाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में ‘ASK SUNDAR’ सेशन में स्पीच दे रहे थे। यहां कई कॉलेज और स्कूल के स्टूडेंट्स और टीचर्स मौजूद थे।

– उन्होंने कहा- ‘मैंने भी औरों की तरह सपने देखे थे। मैं क्रिकेटर बनना चाहता था। लेकिन टेक्नोलॉजी के लिए प्यार मुझे इस प्रोफेशन में ले आया। हालांकि, 12वीं में इतने नंबर नहीं आए थे कि इस कॉलेज में एडमिशन ले सकूं।’ सेशन की एंकरिंग मशहूर क्रिकेट कमेंटेटर हर्ष भोगले कर रहे थे।

एंड्रॉइड वर्जन पर क्या हुआ सवाल?

– वीडियो मैसेज के जरिए एक स्टूडेंट का सवाल : एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम के नाम भारतीय मिठाइयों के नाम पर क्यों नहीं होते? जैसे N फॉर नान खटाई, M फॉर मेयप्पन, P फॉर पेड़ा। – इस सवाल पर पूरे हॉल में तालियां बज गईं।

– पिचाई ने ठहाका लगाया। सवाल पूछ रहे टीवी कमेंटेटर हर्ष भोगले मुस्कुरा दिए।

– जवाब में पिचाई ने कहा : जब मैं अपनी मां से मिलूंगा तो उनसे इस बारे में सजेशन मांगूगा। जब हम एंड्रॉइड के अगले रिलीज यानी एंड्रॉइड N पर काम करेंगे, तब हम ऑनलाइन पोल करेंगे कि इसका क्या नाम होना चाहिए? अगर सभी भारतीय वोट करते हैं तो हम ऐसा कर सकते हैं।

हर्ष : आपकी मां तो P फॉर पायसम का भी सजेशन दे सकती हैं।

पिचाई: जब मैं यंग था तो मीठी चीजें नहीं पसंद करता था। मैं पायसम (खीर) लेता था और उसमें सांभर मिला देता था ताकि वह बहुत ज्यादा मीठा न लगे।

हर्ष: नहीं। एंड्रॉइड के S वर्जन यानी सांभर की बारी आने तक लंबा इंतजार करना होगा।

pichaiपिचाई से रैपिड फायर सवाल-

आपने कब पहला फोन खरीदा?
पिचाईः मोटोरोला 1995-96 में और पहला स्मार्ट फोन 2006 में।

कितने स्मार्ट फोन घर में हैं?
पिचाईः करीब 20-30 हैं घर में हैं।

कोडिंग क्या सबके लिए जरूरी?
पिचाईः नहीं, पर इसे बढ़ावा देने चाहिए।

12वीं में कितने नंबर लाए थे?
पिचाईः इतने नहीं मिले थे कि श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में एडमिशन मिल सके। आईआईटी में 12वीं के नंबर्स के आधार पर एडमिशन नहीं मिला।

12वीं के नंबर कितने जरूरी होते हैं?
पिचाईः कई सारे टीचर यहां बैठे हैं, इसलिए यहां इसका जवाब नहीं देना चाहिए।

30 साल में गूगल कहां होगा?
पिचाईः बड़ा सवाल है। 30 साल में हम उन समस्याओं पर काम करते रहेंगे जो लोगों के जीवन से जुड़ी हैं। जो इंसानियत से जुड़ी हैं। यही कोर पार्ट होगा हमारा। ऐसे किसी प्रोडक्ट पर काम करना जो सब लोगों तक किसी न किसी दिन पहुंचे। जो लोगों की जिंदगी को बदले। सभी तक पहुंचाना यह हमारे काम का फाउंडेशन है।
गगन कायरा ने सोशल मीडिया से पूछा- इंडियंस के लिए स्पेशल एजुकेशन स्टारवार कार्डबोर्ड क्यों नहीं है?
पिचाईः हमें इसका हल निकालना होगा। पिछले हफ्ते इस बारे में बात हुई है।

हर्ष : कई लोग कल के बारे में सपने देखते हैं। आप क्या कल के बारे में सोचते थे?
पिचाई : औरों की तरह मैंने भी सपने देखे। क्रिकेटर बनना चाहता था। सुनील गावस्कर का बहुत बड़ा फैन था। लेकिन मैं हमेशा टेक्नोलॉजी से प्यार करता था। यही मुझे इस प्रोफेशन में खींच लाया।

हर्ष : आप आईआईटी खड़गपुर में रहे हैं। कैसे अपने दोस्तों के साथ और ड्रीम के साथ टच में रहे?
पिचाई : तब इंटरनेट नहीं था। उस वक्त मैं ज्यादातर पढ़ता था।

हर्ष : गूगल और आप नई जेनरेशन के लिए क्या करते रहेंगे?
पिचाई : 80 के दशक में पर्सनल कंप्यूटर सपना हुआ करता था। फिर 10 साल बाद इंटरनेट और फिर 10 साल बाद स्मार्टफोन। आपको हमेशा रीइन्वेंट करना पड़ता है। भारत अमेजिंग कंट्री है। यहां बहुत टैलेंट है।

हर्ष : गूगल में काम करने का एक्सपीरियंस कैसा है?
पिचाई : गूगल में काम करना फन की तरह है। अपने दिल की सुनना बहुत जरूरी। गूगल इज ग्रेट प्लेस टू वर्क। आपको जो करना है करें।

हर्ष : एक नंबर पर काम करना और फिर एक नंबर पर बने रहना कितनी चैलेंजिंग है?
पिचाई : टेक्नोलॉजी में आपको हमेशा नया करना होता है। आपको आगे के बारे में सोचना पड़ता है। एंड्रॉयड पॉपुलर है। लोग स्मार्टफोन यूज कर रहे हैं। आगे भी नई चीजें आएंगी। सिलिकॉन वैली में अपनी कंपनी इसलिए शुरू कर पाए क्योंकि फेल होने से डर नहीं था। रिस्क होना जरूरी है। आप लोगों से आइडिया डिस्कस करते हैं तो वे ही लोग आपको आगे बढ़ाते हैं।

हर्ष : आप क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन आधी रात को भी फुटबॉल के बारे में ट्वीट करते हैं?
पिचाई : मैं बार्सीलोना फुटबॉल टीम का फैन हूं। जब मैं यंग था तो मैं आधी रात को उठकर फुटबॉल मैच देखता था। मैं मेसी का भी फैन हूं।

हर्ष : टेस्ट क्रिकेट या टी-20?
पिचाई : चेन्नई में एक बार इंडिया-ऑस्ट्रेलिया का मैच देखने गया था। मैं टेस्ट आज भी पसंद करता हूं। देखने के लिए वक्त भी निकालता हूं। टी-20 भी देखता हूं।

हर्ष : वॉट नेक्स्ट फॉर गूगल? क्या गूगल 150KM से बॉलिंग करेगी?
पिचाई : अगर करेगी तो मैं सीक्रेट तरीके से उसे बनाऊंगा। कई लोग कंप्यूटर साइंस पढ़ रहे हैं। उन्हें एक्सटेंशन देंगे। सेल्फ ड्राइविंग कार जैसी चीजें पहले ही आ गई हैं। हेल्थ केयर फील्ड में भी हम आगे काम करना चाहते हैं।

आईआईटी खड़गपुर से सवाल : सरकार सिलिकॉन वैली जैसा सेटअप भारत में लाना चाहती है? यह कैसे देश का पेस चेंज करेगा ?

पिचाई : इंडिया में बहुत सारी संभावना है। बहुत कुछ करने के हालात हैं। मैं जिन एंटरप्रैन्योर्स से मिला वे बहुत एनर्जेटिक लगे। वे मेरे ही तरह हैं। उनमें कॉन्फिडेंस है। यहां बड़ा डोमेस्टिक मार्केट है।

हंसराज कॉलेज से चंद्रा नायर : सीईओ नहीं होते तो क्या करते?
पिचाई : मैं फुटबॉल या क्रिकेट में जाता। पर मैं सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट बनाता हूं। उससे प्यार करता हूं। वही करना चाहता था।

एसआरसीसी से सौम्या जोशी : आपको किस बात ने मोटिवेट किया?
पिचाई : जब इंटरनेट शुरू हुआ तो पहले तो पता था कि यह इंसानियत को अपने साथ जोड़ेगा। मैं इसका हिस्सा बनना चाहता था। मैं लोगों का हौसला बढ़ाता हूं। आपको उन लोगों के साथ काम करना पड़ता है जो आप से अच्छा काम करते हैं, वे आपका भी हौसला बढ़ाते हैं। आप एक ग्रुप में काम करते हैं तो सीखने का मौका मिलता है।

श्रेय गोस्वामी : कई डेवलपर्स हैं। स्टार्टअप्स हैं। उनकी मदद के लिए गूगल कैसे प्लानिंग कर रहा है?
पिचाई : डेवलपर्स जितने रहेंगे आपका काम, आपकी दिक्कत उतनी जल्दी खत्म होगी। आप जिन नए प्रोग्राम्स में इन्वेस्ट कर रहे हैं, उसमें मदद मिलेगी। मेरे लिए डेवलपर्स की ट्रेनिंग अहम है ताकि वे हमारी समस्याओं को सुलझा सकें।

आर्मी पब्लिक स्कूल से मालिनी नारायणन : कैसे हम दूसरे देशों से आगे निकल सकते हैं?
पिचाई : भारत में मजबूत एजुकेशन सिस्टम है। लेकिन आपको देखना होगा कि नेक्स्ट जेनरेशन की क्या दिक्कत है? उसे सॉल्व करना होगा। क्रिएटिविटी बनाए रखनी होगी। यूएस में लोग सीखते हैं कि कैसे चीजों को किया जाता है। ऐसा सिस्टम बनाना होगा जो क्रिएटिविटी को निखारे। स्टूडेंट्स को रिस्क लेना सिखाना होगा।

ऋषिकेश मोरे : आईटी सेक्टर में कंपनियां क्या कर सकती हैं?
पिचाई : ऐसा कुछ नहीं है कि जो भारत में नहीं किया जा सकता। मेरे लिए बड़ी चीज होगी इंटरनेट यूसेज को आसान बनाना। चीन की तरह। ये केवल वक्त की बात है। भारत में जरूर होगा।

नॉर्थ कैंप यूनिवर्सिटी से सुषमा : गूगल कैसे 400 स्टेशनों पर वाईफाई देगा?
पिचाई : यह बड़ा प्रोजेक्ट है। 1 करोड़ पैसेंजर्स के लिए है। स्टेशनों पर आप अपने फेवरेट बॉलीवुड वीडियो हाई स्पीड में देख सकेंगे। जब आपके पास इंटरनेट होता है तो आपकी जिंदगी बदल जाती है। खासकर पब्लिक प्लेस पर यह फेसिलिटी मिलेगी तो और अच्छा फील करेंगे।

मिरांडा हाउस से श्रेया वर्मा : महिलाओं को टेक्नोलॉजी से जोड़ने के लिए क्या करेगी?
पिचाई : यह ग्लोबल प्रॉब्लम है। हम पायलट प्रोजेक्ट लाए हैं इंटरनेट साथी। हम महिलाओं को सिखाएंगे कि कैसे रुरल एरिया में स्मार्टफोन कनेक्शन लाएं? वे फोन के जरिए अपने हसबैंड अपने बच्चों के बारे में पता कर सकेंगी। उन्हें ऑनलाइन मदद मिलेगी। हम अपने प्रोग्राम को बढ़ाएंगे। हम 30000 गांवों को कनेक्ट करेंगे। हम सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे।

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कल पिचाई ने क्या किया?

– बुधवार को भारत पहुंचे सुंदर पिचाई ने दिल्ली गूगल फॉर इंडिया इवेंट में स्पीच दी।
पिचाई ने कहा था- भारत ने मुझे और गूगल को बहुत दिया, अब बदले में देने की बारी मेरी है। गूगल वह हर कोशिश करेगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा भारतीय ऑनलाइन आएं

– शाम को पिचाई ने फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली और टेलिकॉम मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद से मुलाकात की थी।

  1. 100 रेलवे स्टेशनों पर मिलेगी वाई-फाई सर्विस

– दिसंबर, 2016 तक गूगल भारत के सौ स्टेशनों पर वाई-फाई सर्विस देगा।
– मुंबई सेंट्रल पहला स्टेशन होगा, जिसे जनवरी तक वाई-फाई सर्विस मिल जाएगी।
– पीएम मोदी के अमेरिका दौरे के वक्त गूगल ने भारत के 400 रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई देने की बात की थी। यह प्रोजेक्ट उसी का हिस्सा है।

हैदराबाद में शुरू होगा नया कैम्पस
– गूगल हैदराबाद में अपना एक नया कैम्पस शुरू करेगा।
– कंपनी भारत के लिए प्रोडक्ट बनाने के मकसद से हैदराबाद में इंजीनियरिंग प्रेजेंस बढ़ाएगी।
– गूगल बेंगलुरु में पहले से ही मौजूद कैम्पस के लिए हायरिंग भी बढ़ाएगा।

गांवों में इंटरनेट प्रोग्राम
– गूगल भारत के गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए रूरल इंटरनेट प्रोग्राम शुरू करेगा।
– इसके तहत देश के तीन लाख गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रोवाइड करवाई जाएगी।
– इस प्रोग्राम का मुख्य फोकस महिलाओं को इंटरनेट से जोड़ने पर होगा। इसमें तीन साल लगेंगे।
– 2018 तक भारत में 23 भाषाओं के 50 करोड़ ऑनलाइन यूजर्स हो जाएंगे। पर इनमें से 30 पर्सेंट के पास टूजी कनेक्टिविटी ही होगी।

तैयार होंगे 20 लाख एंड्रॉइड डेवलपर
– गूगल अगले तीन साल में भारत में 20 लाख नए एंड्रॉइड डेवलपर तैयार करेगा।
– इसके तहत देश की 30 यूनिवर्सिटियों के साथ एक प्रोग्राम शुरू किया जाएगा।
– इस प्रोग्राम में भारत सरकार की नेशनल स्किल डेवलपमेंट काउन्सिल से भी मदद ली जाएगी।

प्रोजेक्ट लून
– गूगल भारत में प्रोजेक्ट लून शुरू करेगा।
– इसके तहत गूगल बैलून के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रोवाइड करवाएगा।
– फिलहाल न्यूजीलैंड, ब्राजील और कैलिफोर्निया (अमेरिका) में इस टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग चल रही है।

भारत में एंड्रॉइड यूजर्स अमेरिका से ज्यादा
– गूगल के सीईओ ने कहा कि भारत में एंड्रॉइड यूजर्स की संख्या 2016 तक अमेरिका के एंड्रॉइड यूजर्स से भी कहीं ज्यादा हो जाएगी।

11 भाषाओं को सपोर्ट करेगा की-बोर्ड
– एंड्रॉइड का वर्चुअल की-बोर्ड भारत की 11 भाषाओं को सपोर्ट करेगा।
– पिचाई ने बताया कि उनकी सर्च टीम ने पेजेस को लाइटर और फास्टर बनाया है। इससे भी गूूगल का यूज करने वालों की संख्या में इजाफा होगा।

लाइव स्कोर
– पिचाई ने कहा कि गूगल जनवरी से क्रिकेट के लाइव स्कोर और वीडियो अपडेट्स भी अवेलेबल कराएगा।

गूगल ज्वॉइन करने को लेकर क्या कहा?
पिचाई ने कहा कि 2004 में ज्वॉइन करने के पहले गूगल सर्च ने मुझे अट्रैक्ट किया। मुझे लगा कि स्टैनफोर्ड के प्रोफेसर से लेकर भारत के गांव के गरीब बच्चे तक को इसके इस्तेमाल के बाद एक जैसा एक्सपीरियंस होता है। यही डिजिटल इक्वॉलिटी है। मेरी पूरी टीम भारत आई हुई है।

डिजिटाइजेशन के तीन फेज

– पिचाई ने कहा “हम बताने आए हैं कि हमारा सफर कहां से शुरू हुआ था, अभी कहां पहुंचे हैं और आगे कहां जाना है?” मैं भारत में डिजिटाइजेशन को तीन फेज में देखता हूं। पहला इंटरनेट तक पहुंच, दूसरा पहुंच चुके व्यक्ति के लिए मनचाहा कंटेंट और तीसरा ऑनलाइन व्यक्ति को एक प्लैटफॉर्म मुहैया होना कि वह इंटरनेट का इस्तेमाल कैसे करे।

आखिरी सवाल: युवाओं को क्‍या संदेश देंगे?
पिचाई: अगर आप अपने सपनों पर भरोसा करते हैं तो आप हर जगह काम कर सकते हैं।

 

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