मिसाइल टेक्नोलॉजी में भारत को मिली बड़ी सफलता, ‘ब्रह्मोस’ का सफल परीक्षण

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जयपुर। मिसाइल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आज भारत को बड़ी सफलता मिली। गुरुवार सुबह राजस्थान के पोखरण में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ का सफल परीक्षण किया गया। दुश्मन के रडार को चकमा देने वाली इस मिसाइल का परीक्षण आज सुबह किया गया। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने इसके सफल परीक्षण की घोषणा की। उन्होंने इससे भारत की सैन्य ताकत को बढ़ावा मिलने की बात कही है। ब्रह्मोस को विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक मिसाइल माना जाता है।

जानिए क्या हैं इसकी खासियतें

ब्रह्मोस की रफ्तार 2.8 मैक (ध्वनि की रफ्तार के बराबर) है। इस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर है। यह 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री ले जा सकती है। हाल में आई खबरों के मुताबिक ब्रह्मोस जैसी क्षमता वाली मिसाइल अभी तक चीन और पाकिस्तासन ने विकसित नहीं की है।

विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस जमीन, समुद्र और हवा से मार करने में सक्षम है। ब्रह्मोस रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओएम का एक संयुक्त उपक्रम है। टाइटेनियम एयरफ्रेम और मजूबत एल्यूमिनियम मिश्र धातु की बनावट की वजह से एसयू-30 को ब्रह्मोस मिसाइल के लिए सबसे उपयुक्त युद्धक विमान माना जाता है।

यह मिसाइल 500 से 14,000 मीटर की ऊंचाई से छोड़ी जा सकती है। मिसाइल छोड़े जाने के बाद यह 100 से 150 मीटर तक मुक्त रूप से नीचे आ सकती है और तब यह 14,000 मीटर में क्रूज फेज में प्रवेश कर सकती है और अंत में इसके बाद यह 15 मीटर में टर्मिनल फेज में प्रवेश कर सकती है।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों को 40 सुखोई युद्धक विमानों में जोड़ने का काम जारी है और माना जा रहा है कि क्षेत्र में नए उभरते सुरक्षा परिदृश्य में इस कदम से भारतीय वायुसेना की ज़रूरतें पूरी हो जाएंगी।

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