बॉर्डर पर जवान की अचानक ख़राब हुई तबीयत, तो इलाज करने के लिए नदी पार कर पहुंचे विधायक

नई दिल्ली: कहा जाता है की डॉक्टर भगवान होते है ऐसे में एक बार डॉक्टर बन जाने के बाद व्यक्ति हमेशा के लिए डॉक्टर हो जाता है.बता दे की यह उक्ति मिजोरम के विधायक जेड आर थियमसांगा पर सटीक बैठती है जो भारत-म्यांमा सीमापर एक सुरक्षाकर्मी की सहायता के लिए नदी पार कर कई किलोमीटर पैदल चल पड़े. थियमसांगा पेशे से डॉक्टर हैं. उन्होंने 2018 में विधायक चुने जाने के बाद डाक्टरी की नियमित प्रेक्टिस छोड़ दी थी लेकिन आज भी दूरदराज के इलाकों में किसी की तबियत खराब होने पर वह आला लेकर दौड़ पड़ते हैं भारत-म्यांमा सीमा पर शनिवार को भारतीय रिजर्व बटालियन के एक कर्मी के पेट में भीषण दर्द होने की सूचना मिलने पर थियमसांगा अपनी डॉक्टर बेटी के साथ चल पड़े. अधिकारियों ने बताया कि उक्त जवान कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सीमा पार आवागमन को रोकने के लिए तैनात दल में शामिल था.थियमसांगा ने पीटीआई-भाषा से कहा कि उन्हें सूचना मिली कि एक सुरक्षा कर्मी को पेट में तेज दर्द है और उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत है. उन्होंने कहा कि वे ड्यूटी पोस्ट तक गए लेकिन वाहन नदी पार नहीं कर सकता था इसलिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा. उन्होंने बताया कि उन्होंने मरीज की जांच की तो पता चला कि सौभाग्य से उसके पेट में कोई सुराख नहीं था.मरीज को प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद उसे चम्फाई के जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया.  विधायक थियमसांगा (62) कोविड-19 के लिए सरकार द्वारा गठित चिकित्सकीय दल के अध्यक्ष भी हैं.

थियमसांगा हमेशा अपने साथ दवाइयां और उपकरण रखते हैं और उनका मानना है कि गरीब, विशेषकर ग्रामीण इलाकों के जरूरतमंद मरीजों का इलाज करना उनकी जिम्मेदारी है.थियमसांगा ने इम्फाल के क्षेत्रीय मेडिकल कालेज से 1985 में एमबीबीएस और 1995 में एमडी की डिग्री हासिल की थी. उन्होंने 2018 में मिजो नेशनल फ्रंट से चुनाव लड़ा और तत्कालीन कांग्रेस विधायक टी टी जोथमसांगा को हराया था.  अभी थियमसांगा राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष भी हैं.

Related Articles