न्यू इंडिया में बढ़ रहे आत्महत्या के मामले : NCRB रिपोर्ट

नई दिल्ली : NCRB के आंकड़ों के मुताबिक जिस समय देश एक महामारी का सामना कर रहा था, उस साल भारत में आत्महत्याओं में 10 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई। जिसमे सबसे ज़्यादा संख्या डेली वेजेस कर्मचारी, खुद का रोजगार करने वालों और गृहिणियों की थी।

 होम मिनिस्ट्री के अंडर काम करती है NCRB

इस कड़ी में राजधानी दिल्ली पर नज़र डालें तो पता चलता है की यहाँ आत्महत्या के मामलों में 24% का भारी उछाल देखा गया। पारिवारिक समस्याएं और बीमारी, यह दो ऐसे प्रमुख कारण हैं, जिस वजह से लोगों ने ऐसा गंभीर कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। आंकड़ों से पता चलता है डेली वेजेस पर काम करने वाले, पुरुषों के आत्महत्या के मामले में खुद का रोजगार करने वाले व्यक्तियों और महिलाओं के आत्महत्य के मामले में गृहिणियां, इन लोगों सबसे ज्यादा आंकड़ा था। रिपोर्ट में कहा गया है, “कुल 1,085,32 पुरुष आत्महत्याओं में से, सबसे ज्यादा आत्महत्या डेली वेजेस वाले लोगों (33,164) ने की, इसके बाद खुद का रोजगार करने वाले व्यक्तियों (15,990) और बेरोजगार व्यक्तियों (12,893) ने आत्महत्या की।”

इसके बाद देश में 2020 के दौरान कुल 44,498 महिलाओं ने आत्महत्या की। आत्महत्या करने वाली महिलाओं में सबसे ज्यादा संख्या (22,372) गृहिणियों की थी, उसके बाद छात्रों (5,559) और डेली वेजेस वालों (4,493) ने आत्महत्या की थी। रिपोर्ट से पता चलता है कि कुल 22 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों ने भी अपनी जान ले ली। इनमें से पांच बेरोजगार थे, 9 डेली वेजेस वाले थे, दो खुद का रोजगार करने वाले और दो गृहिणी थे, जबकि 4 दूसरी कैटेगरी के तहत आते हैं।

ज़्यादातर मौतों की वजह  महामारी के दौरान आईं “पारिवारिक समस्याएं” और “बीमारी थे, इसके साथ साथ नशीली दवाओं की लत, विवाह से जुड़े मुद्दे, प्रेम संबंध, कर्ज आत्महत्या के दूसरे बड़े कारण थे।

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