माता-पिता की उम्‍मीदों के बोझ तले दबकर एक और बेटे ने दे दी जान

कोटा (जयपुर)। इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी और कोचिंग के लिए प्रसिद़ध कोटा में एक और छात्र उम्‍मीदों के बोझ को बर्दाश्‍त नहीं कर सका। कॉपी, किताबों और कॅरियर की तमाम ऊंची अपेक्षाओं से तंग आकर उसने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्‍महत्‍या कर ली। शिवदत्त नामक इस छात्र ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि वह अपनी असफलता से दुखी थी, क्योंकि वह अपनी और अपने माता-पिता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा। 12वीं कक्षा में शिवदत्त का नाम राजस्थान उच्च माध्यमिक बोर्ड की मेरिट लिस्ट में था। इस साल कोटा में किसी छात्र द्वारा की गई यह 28वीं आत्महत्या है।

कॅरियर की फ‍िक्र में रोज खुदकुशी कर रहे हैं तीन नौजवान

किसान पिता के बेटे 20 साल के शिवदत्त को काफी अच्छा छात्र माना जाता था। वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था और तैयारी के सिलसिले में ही पिछले अप्रैल से कोटा में रह रहा था। पुलिस को शिवदत्त का जो नोट मिला है, उसमें लिखा है, ‘पापा, मम्मी मुझे माफ कर देना। मैं आपकी उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाया।

मेडिकल की परीक्षा में पहली बार रहा था नाकाम

जवाहर नगर के प्रभारी राजेश मेशराम ने कहा, ‘शिवदत्त दूसरी बार इस परीक्षा में बैठा था। इससे पहले वह असफल रहा था। इसी कारण उसके अभिभावकों ने उसे बेहतर तैयारी के लिए कोटा भेजा था।’ शिवदत्त 8 अन्य छात्रों के साथ पेइंग गेस्ट के तौर पर रहता था। उसका चचेरा भाई मनोज भी उसके साथ उसी कमरे में रहता था। मनोज भी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा है। शिवदत्त जिस घर में रहता था, उसके मालिक जयपुर में अपने परिवार के साथ रहते हैं। मेशराम ने बताया, ‘शिवदत्त मंगलवार को क्लास में नहीं गया। मनोज जब कोचिंग संस्थान से लौटा तो उसने दरवाजे को अंदर से बंद पाया। मनोज ने एक खिड़की से अंदर झांक कर देखा और उसने शिवदत्त को लटकते हुए पाया। उसने तुरंत ही परिवार के सदस्यों को सूचना दी।’

क्‍या कहते हैं कोटा के कलक्‍टर

कोटा के कलक्‍टर रवि कुमार ने बताया कि 2014 में कोचिंग संस्थानों के 8 छात्रों ने आत्महत्या की थी। वहीं साल 2013 में इस संस्थानों में पढ़ने वाले 13 छात्रों ने परीक्षा में असफलता के कारण आत्महत्या का रास्ता चुना। उन्होंने बताया कि इस साल खुदकुशी के इन आंकड़ों में और भी तेजी आई है, जो कि काफी चिंता का विषय है।

 

आत्‍महत्‍याओं से प्रशासन भी चिंतित

कोटा में छात्रों की बढ़ती आत्‍महत्‍याओं की घटनाओं से प्रशासन और अधिका‍री भी चिंतित हैं। 10 दिसंबर को ही राजस्थान के मुख्य सचिव सी.एस. राजन ने कोटा में छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों के मद्देनजर जिलाधिकारियों, कोचिंग संस्थानों के मालिकों, हॉस्टल के मालिकों व अन्य पक्षों को बुलाकर एक बैठक की थी। इस बैठक में छात्रों के ऊपर दबाव कम करने के उपायों पर बात की गई थी।

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