सुंदरकाण्ड करेगा आपके हर तरह के कष्टों का अंत, इस तरह करें बजरंग बली को प्रसन्न

नई दिल्ली। हिंदू धर्म की मान्यतानुसार, धार्मिक ग्रंथों में व्यक्ति की हर समस्या का हल छिपा हुआ होता है। लोग जीवन में सुख-शांति पाने के लिए तरह-तरह के प्रयास करते हैं। सुंदरकाण्ड को हिंदू धर्म में बहुत महत्व दिया गया है। इसका पाठ करने वालों के सारे कष्टों का अंत हो जाता हैं। सुंदरकाण्ड का नियमित पाठ करने से व्यक्ति पर बजरंग बली की विशेष कृपा रहती है। आज हम आपको इसका धार्मिक महत्व व विशेषता बताने जा रहे हैं।

जानिए सुंदरकाण्ड क्यों है इतना खास
सुन्दरकाण्ड का इतना माहात्म्य क्यों है? तुलसीदासजी रामकथा लिख रहे थे। हनुमानजी भगवान श्रीराम को अपने आत्मज से ज़्यादा प्रिय थे। प्रभु ने सोचा कि भक्त के मान में मेरा सम्मान है। हनुमानजी के माहात्म्य से संसार को परिचित कराने का ऐसा अवसर कहाँ मिलेगा! प्रभु ने अपना प्रभाव दिखाया। रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड को लिखते-लिखते तुलसी हनुमानजी को श्रीराम के समान सामर्थ्यवान लिख गए।

तुलसीबाबा जितनी भी रामकथा लिखते उसे हनुमानजी को सौंप देते। कथा देखने के बाद हनुमानजी अनुमोदन करते थे। कहते हैं सुंदरकांड बजरंग बली भड़क गए कि भक्त को स्वामी के सामान प्रतापी कैसे लिख दिया?

आगबबूले होकर वह इसे फाड़ने ही वाले थे कि श्रीराम ने उन्हें दर्शन दिए और कहा कि यह अध्याय मैंने स्वयं लिखा है पवनपुत्र, क्या मैं मिथ्या कहूँगा? इस विप्र का क्या दोष?

हनुमान जी नतमस्तक हो गए- प्रभु आप कह रहे हैं तो यही सही है। मुझे मानस में सुंदरकांड सर्वाधिक प्रिय रहेगा। इसलिए सुंदरकांड के पाठ का इतना माहात्म्य है। श्री हनुमान सुन्दरकाण्ड का पाठ करने वाले के कष्ट हरने को तत्पर रहते हैं। यदि रोज़ संभव न हो तो कम से कम मंगलवार या शनिवार को इसका पाठ अवश्य करना चाहिए।

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