निर्भया के दोषियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा सजा-ए-मौत का फैसला

नई दिल्ली। साल 2012 में हुए वीभस्त निर्भया रेप कांड को याद करने पर आज भी लोगों की रूह काँप जाती है। उसके आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पूरे देश ने एक साथ होकर आवाज उठाई थी। उसी के आरोपियों को सजा से बचाने के लिए और उस पर पुनर्विचार करने के लिए आरोपी पक्ष की ओर से एक याचिका डाली गई थी। उस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक में अपना फैसला सुना दिया है। इस मामले में कोर्ट ने चार में से तीन की याचिका खारिज कर दी और उनकी सजा को बरकरार रखा है।

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निर्भया रेप कांड

बता दें सजा के ऐलान होने से पूर्व निर्भया के परिवारी जन कोर्ट पहुंचे थे। यहाँ उन्होंने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की अपील की थी।

खबरों के मुताबिक़ कोर्ट के फैले के अनुसार दोषियों की फांसी की सजा बरकार है। आरोपी विनय, मुकेश और अक्षय को फांसी दी जाएगी। घटना के छह साल बीत जाने के बाद भी निर्भया के घरवाले अभी तक न्याय के लिए जंग लड़ रहे थे।

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बता दें 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली के मुनीरका में 6 लोगों ने चलती बस में पैरामेडिकल की छात्रा से गैंगरेप किया। इसके बाद दरिंदगी की वो सारी हदें पार गए, जिसे देखकर कोई दरिंदा भी दहशत में आ जाए।

वारदात के वक्त पीड़िता का दोस्त भी बस में था। दोषियों ने उसके साथ भी मारपीट की थी। इसके बाद युवती और दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक दिया था।

मामला बढ़ने के बाद 18 दिसंबर, 2012 को दिल्ली पुलिस ने चारों दोषियों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया।

21 दिसंबर, 2012 को पुलिस ने एक नाबालिग को दिल्ली से और छठे दोषी अक्षय ठाकुर को बिहार से गिरफ्तार कर लिया।

29 दिसंबर, 2012 को पीड़िता का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे सिंगापुर भेजा गया। वहां अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़िता जिंदगी की जंग हार गई। पीड़िता की मां ने बताया था कि वह आखिरी दम तक जीना चाहती थी।

इसके बाद शुरू हुआ तारीखों का दौर और निर्भया को न्याय दिलाने के लिए उसके घरवाल इस जंग में किसी भी कीमत पर हार नहीं मानना चाहते थे। आखिरकार उनकी मेहनत सफल हुई और दोषियों को सजा-ए-मौत का फरमान बरकरार रखा गया।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2017 के फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट और निचली अदालत द्वारा 23 वर्षीय पैरामेडिक छात्रा से 16 दिसंबर 2012 को गैंगरेप और हत्या के मामले में उन्हें सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था।

बता दें कि आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल था, उसे किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया और तीन साल के लिए सुधार गृह में रखे जाने के बाद रिहा कर दिया गया था।

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