सुप्रीम कोर्ट ने पूछा इलेक्ट्रिक वाहनों पर क्या रणनीति बना रहे है नितीश गडकरी

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नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने बुद्धवार को केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से इलेक्ट्रिक वाहनों पर चर्चा करने की इच्छा जताई है। भारत के मुख्यन्यायधीश एसए बोबडे ने वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) द्वारा दायर एक मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमे सभी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने के लिए है।

उच्चतम न्यायालय ने वायु प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से, सभी सार्वजनिक परिवहन वाहनों और सरकारी वाहनों की जगह क्रमिक रूप से विद्युत चालित वाहन (ईवी) लाने के मुद्दे पर बुधवार को इच्छा जताई कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री इस विषय पर न्यायालय में आकर बातचीत करें।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने अतिरिक्त सालीसिटर जनरल ए एन एस नादकर्णी से पूछा कि क्या मंत्री अदालत की सहायता के लिए बातचीत करने आ सकते हैं।

नादकर्णी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मंत्री के आने का राजनीतिक कारणों से दुरुपयोग किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं के अदालत में उपस्थित होने में कुछ गलत नहीं है।

इसी के साथ पीठ ने कहा, ‘‘हम समझते हैं कि प्रशांत भूषण जी राजनीतिक शख्सियत हैं लेकिन वह मंत्री से जिरह करने नहीं जा रहे हैं।’’

इससे पहले जनवरी में सुप्रीम कोर्ट सार्वजनिक वाहनों, सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की मांग कर चुका है। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की ओर से दायर यचिका को संज्ञान लेते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया था और सड़क परिवहन मंत्रालय को चार सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा था।

इसी के चलते सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनर्जी इफीशिएंसी सर्विसेज (ईईएसएल) ने विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों से 1000 इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने का टेंडर निकाला है, ताकी साल 2030 तक उसकी सभी गाड़ियां इलेक्ट्रिक वर्जन की हों।

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