जजों की आलोचना करना वकील को पड़ा भारी, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई ये सजा

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट जजों पर बेबुनियाद आरोप और टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्ती दिखाते हुए कहा है कि जजों की आलोचना करना नया ट्रेंड बन गया है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रवृति को खत्म करने के लिए हमें कठोर कदम उठाने होंगे। सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने इस संबंध में अवमानना के दोषी वकील को सजा के तौर पर केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता राशि दान करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने सोमवार को कहा कि बेवजह जजों को टारगेट करना और उन्हें बदनाम करने के चलन पर रोक लगनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि बेबुनियाद धारणा बनाने से कभी-कभी जजों के लिए आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। एक एनजीओ के पदाधिकारी द्वारा चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर बेबुनियाद आरोप लगाने पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कड़ी आपत्ति जताई।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अदालत की गरिमा बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा, इन दिनों जजों पर आधारहीन व बेवजह आरोप लगाना या जजों को टारगेट करना ट्रेंड बनता जा रहा है। इस पर लगाम जरूरी है।’

बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस ए. एम. खानविलकर और जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि यह काफी अपमानजनक है। यह बुरा परिणाम वाला होगा। जब अवमानना के आरोपी वकील ने कोर्ट से नरमदिली की अपील की और हाथ जोड़कर माफी मांगी तो बेंच ने पूछा, ‘आपने केरल बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए क्या किया है?’

अवमानना के दोषी वकील ने जब कोर्ट से रहम की गुहार लगाई तो बेंच ने कहा, ‘अटॉर्नी जनरल ने केरल बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 1 करोड़ की राशि दान की है। आपने अब तक क्या किया?’ तब वाधवन ने कहा कि वह 50 हजार की रकम दान करना चाहते हैं, लेकिन एजी ने इसे 5 लाख करने की मांग की। जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा, ‘अवमानना का दोषी करार करते हुए हमें खुशी नहीं मिलती, लेकिन इन दिनों जजों की आलोचना का यह एक ट्रेंड बन गया है। हम इस प्रवृति को बढ़ावा नहीं दे सकते हैं।’ सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।

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