सुप्रीम कोर्ट का आदेश, इस चुनाव में ना हो NOTA बटन का इस्तेमाल!

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (एससी) ने नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) के इस्तेमार को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य सभा के चुनावों में नोटा के विकल्प का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, एससी ने कहा कि इसका इस्तेमाल सिर्फ प्रत्यक्ष चुनावों में ही किया जा सकता है।

कांग्रेस ने नोटा के खिलाफ की थी अपील

दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने एससी में नोटा को लेकर याचिका दायर की थी। कांग्रेस ने अप्रत्यक्ष चुनावों में नोटा को लागू करने की चुनाव आयोग की शक्तियों पर सवाल खड़े किए थे। पार्टी की ओर मामले की पैरवी वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल कर रहे थे। मामले की सुनवाई मुख्य न्यानधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने की।

गुजरात राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने उठया था नोटा पर सवाल

दरअसल, गुजरात के राज्य सभा चुनाव में विधायकों को नोटा का विकल्प दिया गया था। जिस पर कांग्रेस ने एससी से अप्रत्यक्ष चुनावों से नोटा के विकल्प को बंद करने की अपील की। कांग्रेस के वकील कपिल सिब्बल का तर्क था कि अगर नोटा का विकल्प रहेगा, तो कई विधायक अपनी पार्टी का निर्देशों का पालन नहीं करेंगे। इस बटन का इस्तेमाल वह अपनी पार्टी के खिलाफ भी कर सकते हैं। ऐसे में नोटा का विकल्प हॉर्स ट्रेडिंग यानी विधायकों की खरीद फरोख्त को जन्म देगा। नोटा का विकल्प भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा।

गुलाम नबी आजाद ने गुजरात को बताया था देश का दूसरा कश्मीर

कांग्रेस की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 13 सितंबर से सुनवाई करने का फैसला लिया था। कांग्रेस ने इस मुद्दे को राज्य सभा में भी उठाया था। राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा था, ”यह काफी गंभीर मुद्दा है। इसे केवल गुजरात में लागू किया जा रहा है। पहले केवल जम्मू-कश्मीर में दो संविधान थे। लेकिन, अब गुजरात भी उस सूची में शामिल हो गया है, जहां दो-दो संविधान लागू हैं।”

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