सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को आदेश डॉक्टर और नर्स का वेतन रोकने वालों पर हो कार्रवाई

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोरोना के इलाज में लगे डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का हर तरह से ध्यान रखना सरकारों की जिम्मेदारी है. कोर्ट ने कहा है कि इन कोरोना योद्धाओं को उचित क्वॉरन्टीन सुविधा देने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उन्हें उनका पूरा वेतन समय से मिल सके. 3 जजों की बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि वह 24 घंटे के भीतर इस मसले पर राज्य सरकारों को निर्देश जारी करे.

उदयपुर की डॉक्टर आरुषि जैन की याचिका में कोरोना के इलाज में लगे डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को हॉस्पिटल के नजदीक ही सुविधाजनक तरीके से क्वॉरन्टीन में रखने की मांग की गई थी. इस याचिका में कोरोना के इलाज में लगे लोगों को समय पर वेतन न मिल पाने और उनके वेतन में कटौती जैसे मसले भी उठाए गए थे.

याचिका पर जवाब देते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि वह सभी राज्यों को डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ का पूरा वेतन समय से दिए जाने के मसले पर निर्देश जारी करेगा. यह व्यवस्था भी की जाएगी कि जो इस निर्देश का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट और आईपीसी की धाराओं के तहत कार्यवाही की जाए.

याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट को यह जानकारी दी गई कि उसके दखल के बाद डॉक्टरों के क्वॉरन्टीन सुविधा में बढ़ोतरी देखी गई है. केंद्र सरकार ने भी बताया की कई जगहों पर फाइव स्टार होटल भी डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के क्वॉरन्टीन होम के तौर पर तब्दील किए गए हैं. कोर्ट ने इस बात पर संतोष जताया, लेकिन उसने सरकार के 15 मई के नए सर्कुलर पर सवाल उठाए.

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “आपने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को क्वॉरंन्टीन में रखे जाने के पिछले आदेश में काफी बदलाव कर दिया है. अब यह लिखा गया है कि जो लोग हाई रिस्क एक्स्पोज़र (कोरोना के मरीज के सीधे संपर्क में आने) वाले हैं, उनको ही 7 दिन के लिए क्वॉरन्टीन किया जाएगा. यह सही नहीं है. हर व्यक्ति जो कोरोना के इलाज में किसी भी तरह से लगा है, उसे क्वॉरन्टीन किया जाना चाहिए.“

कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह 24 घंटे के भीतर कोरोना के इलाज में लगे डॉक्टर और हॉस्पिटल स्टाफ का पूरा वेतन समय से दिए जाने का निर्देश राज्य सरकारों को जारी करे. जिस भी हॉस्पिटल में इस निर्देश का पालन न हो, उसके ऊपर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट और आईपीसी की धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए. कोर्ट ने कोरोना के इलाज में लगे सभी लोगों को उचित तरीके से क्वॉरन्टीन किए जाने का भी निर्देश देने के लिए कहा. कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव या स्वास्थ्य सचिव को इस मसले पर उठाए गए कदम का ब्यौरा देते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा है. मामले की सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी.

नर्सों की याचिका पर भी होगी सुनवाई
इस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच ने आज यू नाम की संस्था की याचिका पर भी नोटिस जारी किया 3.5 लाख से ज्यादा नर्सों के नुमाइंदगी वाली इस संस्था ने मेडिकल स्टाफ को पीपीई किट देने समेत बीमारी से बचाने के दूसरे उपाय किए जाने की मांग की है. इस याचिका पर भी सुनवाई अब डॉक्टर आरुषि जैन की याचिका के साथ ही होगी.

एंबुलेंस की उपलब्धता पर भी मांगा जवाब
कोरोना के तेज़ी से फैलाव के मद्देनजर एंबुलेंस की संख्या बढ़ाने और एंबुलेंस के लिए मनमाना चार्ज न वसूले जाने की मांग पर भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया. याचिका में बताया गया गया है कि जिस तादाद में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, उसकी तुलना में एंबुलेंस की बहुत कमी है. कई जगहों पर एंबुलेंस के लिए 15-20 हज़ार तक का भी किराया मांगा जा रहा है.

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