दो सीट से चुनाव लड़ने पर रोक वाली याचिका की जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

 

सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है, ये इंकार एक उम्मीदवार के दो सीटों से चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर जल्द सुनवाई को लेके हुआ है. इससे पहले चुनाव आयोग ने हलफनामा दायर कर एक प्रत्याशी के एक ही सीट से चुनाव लड़ने वाली याचिका का समर्थन किया था. बता दें, बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में एक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने के खिलाफ उम्मीदवारों पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की है.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग से अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा था. आयोग ने कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि दो जगह से चुनाव लड़ना फिर एक सीट छोड़ देना मतदाताओं के साथ अन्याय है. इससे आर्थिक बोझ पड़ता है. इतना ही नहीं आयोग ने सुझाव दिया कि सीट छोड़ने वाले से दोबारा चुनाव का खर्च वसूला जाना चाहिए.

आयोग ने कहा था कि उसने 2004 के चुनाव सुधार प्रस्ताव में ही कहा था कि कानून में संशोधन होना चाहिए और एक से ज्यादा सीट पर चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं होनी चाहिए. हालांकि, सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए नियम का समर्थन किया था. सरकार ने कहा था कि यह प्रावधान उम्मीदवार को बेहतर विकल्प प्रदान करता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप है.

दरसअल अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में जनप्रतिनिधि कानून की धारा 33(7) को अवैध घोषित करने की मांग की गई, जिसके तहत किसी व्यक्ति को दो सीटों से चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है. याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने अगर उम्मीदवार दोनों जगह से जीत जाता है तो उसे एक सीट छोड़नी पड़ती है और उस छोड़ी हुई सीट पर दोबारा उप चुनाव कराया जाता है. इससे आर्थिक बोझ बढ़ता है. चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में याचिका का समर्थन किया था.

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबित है. अश्विनी उपाध्याय ने कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की थी. इससे कोर्ट ने इंकार कर दिया है. बता दें, इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो सीटों अमेठी और वायनाड से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी ने दो सीटों वडोदरा और वाराणसी व सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी और आजमगढ़ सीट से चुनाव लड़ा था. बाद में मोदी ने वडोदरा और मुलायम ने मैनपुरी सीट छोड़ दी थी.

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