सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस, अवैध दवाओं की बिक्री को लेकर मांगा हलफ़नामा

बता दे कि इससे पहले 16 सितंबर को न्यायालय ने कहा था कि सरकार ने कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के लिए रेमडेसिविर और फेवीपिराविर के इस्तेमाल की अनुमति दी है.

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने कोरोना के इलाज के लिए बगैर किसी मंजूरी के रेमडेसिविर और फेवीपिराविर दवाओं के इस्तेमाल को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है. मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने इस याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया है. यह जनहित याचिका अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने दायर की है.

याचिकाकर्ता ने विश्व स्वास्थ संगठन की 15 अक्टूबर की रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि कोरोना वायरस के लिए इन दवाओं को आधिकारिक रूप से कहीं भी नामित नहीं किया गया है. पीठ ने कहा कि वह इस बारे में केंद्र सरकार को सचेत करने जा रही है और इसीलिए उसे नोटिस जारी कर रही है.

बता दे कि इससे पहले 16 सितंबर को न्यायालय ने कहा था कि सरकार ने कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के लिए रेमडेसिविर और फेवीपिराविर के इस्तेमाल की अनुमति दी है. शीर्ष अदालत कोविड-19 के इलाज की इन दो दवाओं का कथित रूप से बगैर वैध लाइसेंस के ही उत्पादन और बिक्री करने वाली 10 भारतीय दवा कंपनियों के खिलाफ सीबीआइ द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. रेमडेसिविर और फेवीपिराविर एंटी वायरल दवाएं हैं और कोविड-19 के मरीजों के इलाज में इनकी उपयोगिता को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों में बहस छिड़ी हुई है.

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